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  • A. एक सामाजिक संरचना
  • B. सभी संस्कृतियों में पवित्र काल
  • C. बहुत अधिक तनाव और चिंता काल
  • D. किशोरावस्था तक का विकास काल
Correct Answer: Option A - समकालीन सिद्धान्त बचपन को एक सामाजिक संरचना मानते है। सामाजिक संरचना का अभिप्राय समाज की इकाइयों की क्रमबद्धता से होता हैं। सामाजिक इकाइयां जैसे समूह, समितियां, संस्थाएं, परिवार, सामाजिक प्रतिमान आदि की क्रमबद्धता को सामाजिक संरचना कहा जाता हैं। कार्ल मैनहीम के अनुसार, ‘‘सामाजिक संरचना शक्तियों के ताने बाने को कहते हैं, जिसके फलस्वरूप अवलोकन तथा सोचने विचारने के तरीके या ढंग विकसित होते हैं।’’
A. समकालीन सिद्धान्त बचपन को एक सामाजिक संरचना मानते है। सामाजिक संरचना का अभिप्राय समाज की इकाइयों की क्रमबद्धता से होता हैं। सामाजिक इकाइयां जैसे समूह, समितियां, संस्थाएं, परिवार, सामाजिक प्रतिमान आदि की क्रमबद्धता को सामाजिक संरचना कहा जाता हैं। कार्ल मैनहीम के अनुसार, ‘‘सामाजिक संरचना शक्तियों के ताने बाने को कहते हैं, जिसके फलस्वरूप अवलोकन तथा सोचने विचारने के तरीके या ढंग विकसित होते हैं।’’

Explanations:

समकालीन सिद्धान्त बचपन को एक सामाजिक संरचना मानते है। सामाजिक संरचना का अभिप्राय समाज की इकाइयों की क्रमबद्धता से होता हैं। सामाजिक इकाइयां जैसे समूह, समितियां, संस्थाएं, परिवार, सामाजिक प्रतिमान आदि की क्रमबद्धता को सामाजिक संरचना कहा जाता हैं। कार्ल मैनहीम के अनुसार, ‘‘सामाजिक संरचना शक्तियों के ताने बाने को कहते हैं, जिसके फलस्वरूप अवलोकन तथा सोचने विचारने के तरीके या ढंग विकसित होते हैं।’’