उस नई तकनीक को क्या कहते है, जो एक कृत्रिम दुनिया के सृजन की क्षमता प्रदान करती है और उसमें लोग परस्पर अंत:क्रिया भी करने लगते हैं?
16129 का वर्गमूल क्या है?
What is the keyboard shortcut for opening a blank new document in MS-Word एम एस. वर्ड (MS -Word) में एक खाली नया डॉक्यूमेंट खोलने के लिए की बोर्ड शॉर्टकट क्या है।
When did Panchayat Raj and Gram Swaraj Adhiniyam, 1993 receive the assent of the Governor in the State of Madhya Pradesh? मध्य प्रदेश में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 को राज्यपाल की सहमति कब प्राप्त हुई?
The term 'Deplogisticated air' is known as डिप्लोमिस्टिकेटेड वायु’ नामक शब्द को कहा जाता है
उत्पादन की लागत............का सिद्धान्त प्रयोग करते हुए न्यूनतम की जा सकती है।
रामपुरा, जो भारत में प्रथम गाँव अपना सौर ऊर्जा प्लांट लगाने वाला बना, वह कहाँ स्थित है?
‘छत से ईंट गिरी’ वाक्य में कौन सा कारक है?
संसद (Parliament) की संयुक्त समिति के नए अध्यक्ष के रूप में किसे नियुक्त किया गया है, जो 130वें संविधान संशोधन विधेयक 2025 की जांच कर रही है?
प्रदत्तप्रश्नानां (प्रश्न संख्या(233-242) विकल्पोत्तरेषु समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखत। अस्ति वाराणस्यां कर्पूरपटको नाम रजक:। स च एकदा अभिनववयस्कया वध्वा सह चिरं केलिं कृत्वा निर्भरमालिङ्ग्य प्रसुप्त:। तदनन्तरं तद्गृहद्रव्याणि हर्तुं चोर: प्रविष्ट:। तस्य प्राङ्गणे गर्दभो बद्धस्तिष्ठति कुक्कुरश्च उपविष्ट: अस्ति। अथ गर्दभ: श्वानमाह- सखे, भवतस्तावदयं व्यापार:। तत् किमिति। त्वम् उच्चै: शब्दं कृत्वा स्वामिनं न जागरयसि? कुक्कुरो ब्रूते-भद्र मम नियोगस्य चर्चा त्वया न कर्तव्या। त्वमेव किम् न जानासि यथा तस्य अहर्निशं गृहरक्षां करोमि। यतोऽयं चिरान्निवृत्तो ममोपयोगं न जानाति। तेनाधुनापि मम आहारदाने मन्दादर:। यतो विना विधुरदर्शनं स्वामिन उपजीविषु मन्दादरा भवन्ति। गर्दभो ब्रूते शृणु रे बर्बर। याचते कार्यकाले य: स किम् भृत्य: स किम् सुह्रत्? कुक्कुरो ब्रूते – शृणु तावत्। भृत्यान्संभाषयेद्यस्तु कार्यकाले स किम् प्रभु: यत:- आश्रितानां भृतौ स्वामिसेवायां धर्मसेवने। पुत्रस्योत्पादने चैव न सन्ति प्रतिहस्तका:।। ततो गर्दभ: सकोपमाह – अरे दुष्टमते! पापीयांस्त्वं यद्विपत्तौ स्वामिकार्योपेक्षां करोषि। भवतु तावत्। यथा स्वामी जागरिष्यति तन्मया कर्तव्यम्। यत: पृष्ठत: सेवयेदर्कम् जठरेण हुताशनम्। स्वामिनं सर्वभावेन परलोकममायया।। इत्युक्त्वा उच्चै: चीत्कारशब्दं कृतवान्। तत: रजक: तेन चीत्कारेण प्रबुद्धो निद्राभङ्गकोपात् उत्थाय गर्दभं लगुडेन ताडयामास। अतोऽहं ब्रवीमि- पराधिकारचर्चां य: कुर्यात् स्वामिहितेच्छया। स विषीदति चीत्कारात् गर्दभ: ताडितो यथा।। अस्य कथाया: नीति:
Explanations:
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