Correct Answer:
Option D - ‘‘जहाँ न धर्म न बुद्धि नहिं नीति न सुजन समाज ते ऐसहि आपुहि नसैं जैसे चौपट राज।।’’ संदर्भित पंक्तियाँ अधेर-नगरी नाटक के छठा अंक में कही गयी है।
अंधेर नगरी प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का सर्वाधिक लोकप्रिय नाटक है। छह अंकों के इस नाटक में विवेकहीन और निरंकुश शासन व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करते हुए उसे अपने कर्मो द्वारा नष्ट होते दिखाया गया है। इस नाटक के प्रमुख पात्र है- महंत, गोवर्धनदास, नारायणदास, हलवाई, कुजडि़न, भिश्ती, बनिया, राजा, मंत्री, फरियादी, घासीराम इत्यादि।
D. ‘‘जहाँ न धर्म न बुद्धि नहिं नीति न सुजन समाज ते ऐसहि आपुहि नसैं जैसे चौपट राज।।’’ संदर्भित पंक्तियाँ अधेर-नगरी नाटक के छठा अंक में कही गयी है।
अंधेर नगरी प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का सर्वाधिक लोकप्रिय नाटक है। छह अंकों के इस नाटक में विवेकहीन और निरंकुश शासन व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करते हुए उसे अपने कर्मो द्वारा नष्ट होते दिखाया गया है। इस नाटक के प्रमुख पात्र है- महंत, गोवर्धनदास, नारायणदास, हलवाई, कुजडि़न, भिश्ती, बनिया, राजा, मंत्री, फरियादी, घासीराम इत्यादि।