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Q: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (प्र.सं.133 -137) महात्मा गाँधी अपना काम अपने हाथ से करने पर बल देते थे। वे प्रत्येक आश्रमवासी से आशा करते थे कि वह अपने शरीर से संबंधित प्रत्येक कार्य, सफाई तक स्वयं करेगा। उनका कहना था कि जो श्रम नहीं करता है, वह पाप करता है और पाप का अन्न खाता है। ऋषि-मुनियों ने कहा है- बिना श्रम किए जो भोजन करता है, वह वस्तुत: चोर है। महात्मा गाँधी का समस्त जीवन-दर्शन श्रम-सापेक्ष था। उनका समस्त अर्थशास्त्र यही बताता था कि प्रत्येक उपभोक्ता को उत्पादनकर्ता होना चाहिए। उनकी नीतियों की उपेक्षा करने के परिणाम हम आज भी भोग रहे हैं। न गरीबी कम होने में आती है, न बेरोजगारी पर नियंत्रण हो पा रहा है और न अपराधों की वृद्धि हमारे वश की बात हो रही है। दक्षिण कोरिया वासियों ने श्रमदान करके ऐसे श्रेष्ठ भवनों का निर्माण किया है, जिनसे किसी को भी ईर्ष्या हो सकती है। महात्मा गाँधी का समस्त जीवन-दर्शन श्रम-सापेक्ष था। आशय स्पष्ट कीजिए।
  • A. महात्मा गाँधी श्रम की बजाय दर्शन को महत्व देते थे।
  • B. महात्मा गाँधी जीवन में सापेक्ष दर्शन को महत्व देते थे।
  • C. महात्मा गाँधी विचार की अपेक्षा श्रम को महत्व देते थे
  • D. महात्मा गाँधी के सभी विचार श्रम पर आधारित थे।
Correct Answer: Option D - महात्मा गाँधी का समस्त जीवन-दर्शन श्रम सापेक्ष था का आशय- महात्मा गाँधी के सभी विचार श्रम पर आधारित थे।
D. महात्मा गाँधी का समस्त जीवन-दर्शन श्रम सापेक्ष था का आशय- महात्मा गाँधी के सभी विचार श्रम पर आधारित थे।

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महात्मा गाँधी का समस्त जीवन-दर्शन श्रम सापेक्ष था का आशय- महात्मा गाँधी के सभी विचार श्रम पर आधारित थे।