Correct Answer:
Option A - ‘‘भिन्न-भिन्न शाखाओं....... इतिहास नहीं बना सकता’’ उपुर्यक्त पंक्तियाँ ‘हिन्दी साहित्य को इतिहास’ के लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने शिवसिंह सेंगर, जार्ज ग्रियर्सन तथा मिश्रबन्धुओं के इतिहास को ‘कविवृत्त संग्रह’ संज्ञा से संबोधित किया है। हिन्दी साहित्योतिहास लेखन की परम्परा आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा रचित ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ का स्थान सर्वोच्च है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का इतिहास मूलत: नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित ‘हिन्दी शब्द सागर’ की भूमिका के रूप में ‘हिन्दी-साहित्य का विकास’ के नाम से सन् 1925 ई. में प्रकाशित हुआ। रामचन्द्र शुक्ल जी ने अपने इतिहास में पहली बार कवियों और साहित्यकारों के जीवन-चरित्र सम्बन्धी इतिवृत्ति के स्थान पर उनकी रचनाओं के साहित्यिक मूल्यांकन को प्रमुखता दी।
A. ‘‘भिन्न-भिन्न शाखाओं....... इतिहास नहीं बना सकता’’ उपुर्यक्त पंक्तियाँ ‘हिन्दी साहित्य को इतिहास’ के लेखक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने शिवसिंह सेंगर, जार्ज ग्रियर्सन तथा मिश्रबन्धुओं के इतिहास को ‘कविवृत्त संग्रह’ संज्ञा से संबोधित किया है। हिन्दी साहित्योतिहास लेखन की परम्परा आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा रचित ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ का स्थान सर्वोच्च है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का इतिहास मूलत: नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित ‘हिन्दी शब्द सागर’ की भूमिका के रूप में ‘हिन्दी-साहित्य का विकास’ के नाम से सन् 1925 ई. में प्रकाशित हुआ। रामचन्द्र शुक्ल जी ने अपने इतिहास में पहली बार कवियों और साहित्यकारों के जीवन-चरित्र सम्बन्धी इतिवृत्ति के स्थान पर उनकी रचनाओं के साहित्यिक मूल्यांकन को प्रमुखता दी।