Correct Answer:
Option B - ‘रुपेया को बजाकर देखा जाता है और आदमी को एक ही बोली से पहचाना जाता है।’– यह उक्ति ‘मैला आंचल’ उपन्यास के पात्र बालदेव का है। मैला आंचल उपन्यास के लेखक फणीश्वर नाथ रेणु हैं। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। 1954 ई. में प्रकाशित इस उपन्यास की कथावस्तु बिहार राज्य के र्पूिणया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं– डॉ. प्रशांत, कमली, बावनदास, बालदेव, लक्ष्मी, तहसीलदार विश्वनाथ आदि। रेणु द्वारा रचित अन्य उपन्यास हैं- परती परिकथा, जुलूस, कितने चौराहे, कलंक मुक्ति, पलटू बाबू रोड इत्यादि।
B. ‘रुपेया को बजाकर देखा जाता है और आदमी को एक ही बोली से पहचाना जाता है।’– यह उक्ति ‘मैला आंचल’ उपन्यास के पात्र बालदेव का है। मैला आंचल उपन्यास के लेखक फणीश्वर नाथ रेणु हैं। यह हिन्दी का श्रेष्ठ और सशक्त आंचलिक उपन्यास है। 1954 ई. में प्रकाशित इस उपन्यास की कथावस्तु बिहार राज्य के र्पूिणया जिले के मेरीगंज की ग्रामीण जिंदगी से संबद्ध है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं– डॉ. प्रशांत, कमली, बावनदास, बालदेव, लक्ष्मी, तहसीलदार विश्वनाथ आदि। रेणु द्वारा रचित अन्य उपन्यास हैं- परती परिकथा, जुलूस, कितने चौराहे, कलंक मुक्ति, पलटू बाबू रोड इत्यादि।