Correct Answer:
Option A - ‘अंधेर नगरी’ नाटक में तीसरा अंक का स्थान ‘जंगल’ है।
• ‘अंधेर नगरी’ प्रहसन भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित 1881 ई. में प्रकाशित हुआ। इस प्रहसन में कुल छ: दृश्य हैं –
प्रथम दृश्य – स्थान – बाहरी प्रान्त
दूसरा दृश्य – स्थान – बाजार
तीसरा दृश्य – स्थान – जंगल
चौथा दृश्य – स्थान – राजसभा
पाँचवा दृश्य – स्थान – अरण्य
छठा दृश्य – स्थान – श्मशान
भारतेन्दु के मौलिक नाटक – वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (1873 ई.), सत्यहरिश्चन्द्र (1875 ई.), विषस्य विषमौषधम् (1876 ई.) भारतदुर्दशा (1880 ई.), नीलदेवी (1881 ई.), प्रेमजोगिनी (1875 ई.) आदि।
A. ‘अंधेर नगरी’ नाटक में तीसरा अंक का स्थान ‘जंगल’ है।
• ‘अंधेर नगरी’ प्रहसन भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित 1881 ई. में प्रकाशित हुआ। इस प्रहसन में कुल छ: दृश्य हैं –
प्रथम दृश्य – स्थान – बाहरी प्रान्त
दूसरा दृश्य – स्थान – बाजार
तीसरा दृश्य – स्थान – जंगल
चौथा दृश्य – स्थान – राजसभा
पाँचवा दृश्य – स्थान – अरण्य
छठा दृश्य – स्थान – श्मशान
भारतेन्दु के मौलिक नाटक – वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति (1873 ई.), सत्यहरिश्चन्द्र (1875 ई.), विषस्य विषमौषधम् (1876 ई.) भारतदुर्दशा (1880 ई.), नीलदेवी (1881 ई.), प्रेमजोगिनी (1875 ई.) आदि।