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Q: .
  • A. एक
  • B. तीन
  • C. चार
  • D. दो
Correct Answer: Option B - ‘‘तुम जीवन से तटस्थ हो सकते हो, परन्तु मैं तो अब तटस्थ नहीं हो सकती।’’ उपर्युक्त पंक्तियाँ ‘आषाढ़ का एक दिन’ के अंक तीन से ली गई हैं। मोहन राकेश कृत ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में यह कथन मल्लिका कालिदास से कहती है। इसका प्रकाशन वर्ष 1958 ई. है। इस नाटक के प्रमुख पुरुष पात्र - कालिदास, विलोम, मातुल और निक्षेप हैं तथा प्रमुख नारी पात्र मल्लिका, अम्बिका प्रियंगुमंजरी आदि हैं। यह नाटक तीन अंकों में बँटा है। मोहन राकेश के अन्य प्रमुख नाटक-लहरों के राजहंस (1963) तथा आधे-अधूरे (1969) हैं।
B. ‘‘तुम जीवन से तटस्थ हो सकते हो, परन्तु मैं तो अब तटस्थ नहीं हो सकती।’’ उपर्युक्त पंक्तियाँ ‘आषाढ़ का एक दिन’ के अंक तीन से ली गई हैं। मोहन राकेश कृत ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में यह कथन मल्लिका कालिदास से कहती है। इसका प्रकाशन वर्ष 1958 ई. है। इस नाटक के प्रमुख पुरुष पात्र - कालिदास, विलोम, मातुल और निक्षेप हैं तथा प्रमुख नारी पात्र मल्लिका, अम्बिका प्रियंगुमंजरी आदि हैं। यह नाटक तीन अंकों में बँटा है। मोहन राकेश के अन्य प्रमुख नाटक-लहरों के राजहंस (1963) तथा आधे-अधूरे (1969) हैं।

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‘‘तुम जीवन से तटस्थ हो सकते हो, परन्तु मैं तो अब तटस्थ नहीं हो सकती।’’ उपर्युक्त पंक्तियाँ ‘आषाढ़ का एक दिन’ के अंक तीन से ली गई हैं। मोहन राकेश कृत ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में यह कथन मल्लिका कालिदास से कहती है। इसका प्रकाशन वर्ष 1958 ई. है। इस नाटक के प्रमुख पुरुष पात्र - कालिदास, विलोम, मातुल और निक्षेप हैं तथा प्रमुख नारी पात्र मल्लिका, अम्बिका प्रियंगुमंजरी आदि हैं। यह नाटक तीन अंकों में बँटा है। मोहन राकेश के अन्य प्रमुख नाटक-लहरों के राजहंस (1963) तथा आधे-अधूरे (1969) हैं।