Correct Answer:
Option C - मेरठ के विद्रोही 11 मई को दिल्ली पहुँचे और 12 मई 1857 ई. को उन्होनें दिल्ली पर अधिकार कर बहादुर शाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित किया। दिल्ली में सरकारी काम काज चलाने तथा सारे फौजी एवं गैर फौजी मामलों का फैसला करने के लिए एक परिषद गठित की गई। आरम्भ में इसका नेतृत्व मुगल शाहजादे कर रहे थे। लेकिन 3 जुलाई 1857 ई० को जब बख्त खां बरेली से आ गए तब उन्हें मुख्य नेता बना दिया गया। 20 सितम्बर 1857 को दिल्ली पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया परन्तु इस संघर्ष में निकोलसन मारा गया। हड़सन ने सम्राट के दो पुत्रों मिर्जा मुगल और मिर्जा ख्वाजा सुल्तान और पोते मिर्जा अबू बक्र को दिल्ली के लाल किले के सामने गोली से मार डाला तथा बहादुर शाह द्वितीय को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया। मेरठ के विद्रोही 11 मई को दिल्ली पहुँचे और 12 मई 1857 ई. को उन्होनें दिल्ली पर अधिकार कर बहादुर शाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित किया। दिल्ली में सरकारी काम काज चलाने तथा सारे फौजी एवं गैर फौजी मामलों का फैसला करने के लिए एक परिषद गठित की गई। आरम्भ में इसका नेतृत्व मुगल शाहजादे कर रहे थे। लेकिन 3 जुलाई 1857 ई० को जब बख्त खां बरेली से आ गए तब उन्हें मुख्य नेता बना दिया गया। 20 सितम्बर 1857 को दिल्ली पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया परन्तु इस संघर्ष में निकोलसन मारा गया। हड़सन ने सम्राट के दो पुत्रों मिर्जा मुगल और मिर्जा ख्वाजा सुल्तान और पोते मिर्जा अबू बक्र को दिल्ली के लाल किले के सामने गोली से मार डाला तथा बहादुर शाह द्वितीय को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया।
C. मेरठ के विद्रोही 11 मई को दिल्ली पहुँचे और 12 मई 1857 ई. को उन्होनें दिल्ली पर अधिकार कर बहादुर शाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित किया। दिल्ली में सरकारी काम काज चलाने तथा सारे फौजी एवं गैर फौजी मामलों का फैसला करने के लिए एक परिषद गठित की गई। आरम्भ में इसका नेतृत्व मुगल शाहजादे कर रहे थे। लेकिन 3 जुलाई 1857 ई० को जब बख्त खां बरेली से आ गए तब उन्हें मुख्य नेता बना दिया गया। 20 सितम्बर 1857 को दिल्ली पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया परन्तु इस संघर्ष में निकोलसन मारा गया। हड़सन ने सम्राट के दो पुत्रों मिर्जा मुगल और मिर्जा ख्वाजा सुल्तान और पोते मिर्जा अबू बक्र को दिल्ली के लाल किले के सामने गोली से मार डाला तथा बहादुर शाह द्वितीय को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया। मेरठ के विद्रोही 11 मई को दिल्ली पहुँचे और 12 मई 1857 ई. को उन्होनें दिल्ली पर अधिकार कर बहादुर शाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित किया। दिल्ली में सरकारी काम काज चलाने तथा सारे फौजी एवं गैर फौजी मामलों का फैसला करने के लिए एक परिषद गठित की गई। आरम्भ में इसका नेतृत्व मुगल शाहजादे कर रहे थे। लेकिन 3 जुलाई 1857 ई० को जब बख्त खां बरेली से आ गए तब उन्हें मुख्य नेता बना दिया गया। 20 सितम्बर 1857 को दिल्ली पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया परन्तु इस संघर्ष में निकोलसन मारा गया। हड़सन ने सम्राट के दो पुत्रों मिर्जा मुगल और मिर्जा ख्वाजा सुल्तान और पोते मिर्जा अबू बक्र को दिल्ली के लाल किले के सामने गोली से मार डाला तथा बहादुर शाह द्वितीय को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया।