अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानां (61-68) विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत- भारवि: पितु: सपरिश्रमं पठति स्म। परन्तु पिता तस्य वैदुष्यम् एकवारम् अपि नैव प्रशंसितवान्। अनेन खिन्न: भारवि: पितरं हन्तुं निलीन:। रात्रौ तस्य मात्रा पृष्ठ: पिता कथितवान्- ‘‘भारवि: विश्व-विख्यात: एक अजर: अमर: महाकवि; भवतु। इदं विचार्य एव अहं तं प्रत्यक्षं नैव प्रशंसामि। प्रशंसा प्रगतौ पूर्ण-विरार्म योजयति। इदं श्रुत्वा भारवि: स्वाचरणे पश्चातापं कुर्वन् प्रकटोभूय पितृ-पादयो खड्गं निधाय स्वविचारितं सर्व सत्यं सत्यम् अकथयत्: तदपराधे च आत्मानं हन्तुं निर्णयं श्रावितवानं पित्रा तु ‘आत्महत्या महान् अपराध:’ इति सन्दिश्य प्रायश्चित्त-रूपं पत्न्या सह श्वशुरालये कानिचित् वर्षाणि प्रवासं कर्तुं स: निद्र्दिष्ट:। भारवि: तथाएव कृतवान्। कानिचित् दिनानि स: श्वशुरालय। सपत्नीक: सानन्दं: स्थितवान्। किन्तु पश्चात् श्वशुरेण आज्ञप्त: भारवित तस्य गा: चारयितुं प्रवृत्त:। एकत: गाव: स्वेच्छया विचरन्त्य: चरन्ति स्म, तर्हि अन्यत: उपविश्य भारवि: किरातार्जुनीयं नाम महाकाव्यं रचयितुं प्रावर्तत। गवां स्वक्षेत्रे प्रविश्य चरणेन कुपित: तत्क्षेपति: भारवे: श्वशुरं भारवे: चेष्टितं यदा अश्रावयत् तदा श्वशुर: भारविं स्वकार्यं सावधानता-पूर्वंक सम्पादयितुं परुष-वाचा कथितवान् अपि। किन्तु अनेन रुष्ट: न भूत्वा भारवि: महाकाव्य-विरचनं नैव त्यक्तवान्। भारवि: किरातार्जुनीयस्य कानिचित् सुभाषितानि रात्रौ स्वपत्नीम् अपि श्रवयति स्म। आसात् सा संस्कृतज्ञ विदुषी। स्मरणशक्ति तस्या: तीव्रा आसीत्। एकदा सा गृहदार्सी- ‘‘सहसा विदधीत न क्रियाम्, अविवेक: परमापदां पदम्। वृणुते हि विमृश्य कारिणुं, गुण-लुब्धा स्वयमेव सम्पदा।।’’ इसं श्लोकं श्रावितवती। सा अपि तत: प्रभाविता इमम् एव श्लोकम् अन्यत्र यत्र सा कार्य करोति स्म-तत्रत्यां गृह-स्वामिनीम् अश्रावयत्। सा तृ स्व-शयन-कक्षे स्थूल-स्थूलाक्षरेषु इमं लेखयित्वा उपयुक्त-स्थाने-सुरक्षितवती। द्वितीयास्मिन् एव दिने व्यापाराय दश-पञ्चदश-वर्षेभ्य: विदेशे कृत- प्रवास: तस्या: पति: रात्रौ प्रतिनिवृत्त:। स: पत्न्या: कक्षे तरुणं हृष्टं पुष्टं युवकं शयानं। दृष्ट्वा पत्नीं च दुराचारिणा मत्वा यावत् एव तं हन्तुं प्रवृत्त: तावत् एवं तस्य दृष्टौ उपर्युक्त: श्लोक: आपतित:। विरम्य स: किञ्चित् विचारयितुं प्रवृत्त;, तावत् एव तस्य पत्नी तं यथार्थतां प्रबोधितवती यत् अयम् आवयो: आत्मज: एव। ‘‘पापात् अहं सुरक्षित: अस्मि अनेन श्लोकेन’’ इति उक्तवा स: तस्य लेखकं भारचितं तदीयम् आवासन् उपगत्य बहु-बहु-धन-मानादि-समर्पणेन अभ्यनन्त्। श्वशुर: अपि अनेन अत्मानं गौरवन्तिवम् अमन्यत। पुन: प्रायश्चितावधौ समाप्ते गृहं प्रत्यावृत्तं भारविं पिता अति प्रवहदानन्दाश्रुपुर: पुन: पुन: समाश्लिष्य भूरि-भूरि मुक्तकण्ठम् अभिनन्दितवान् इति।‘पापात्’ इति अस्मिन् पदे का विभक्ति: ?
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A boat covers a certain distance downstream in 4 hours and returns upstream 6 hours. If the speed of the boat in still water is 30 km/h, then what is the speed of the current in km/h?
हाल ही में चर्चा में रहा फुएगो ज्वालामुखी किस देश में स्थित है?
भारत में सड़कों को चिह्नित करने के लिए किस रंग का व्यापक प्रयोग किया जाता है?
Density of a fluid is its mass per unit volume. The dimension of density of a fluid is ______. किसी तरल का घनत्व उसका द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन होता है। तरल के घनत्व की विमा ...... है।
Which of the following Buddhist texts wre written in Sanskrit language? Choose the correct option from below: निम्न में से किन बौद्ध ग्रंथों की रचना संस्कृत भाषा में की गई? निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए– A. Divyavadan/दिव्यावदान B. Deepvansha/दीपवंश C. Mahavansha/महावंश D. Aryamanjushree Moolkalp/आर्यमंजूश्री मूलकल्प
निर्देश : (96-100) दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढि़ए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए। भारत वर्ष बहुत बड़ा देश है। इसका इतिहास बहुत पुराना है। इस इतिहास का जितना अंश जाना जा सकता है, उसकी अपेक्षा जितना नहीं जाना जा सकता, वह और भी पुराना और महत्वपूर्ण है। न जाने किस अज्ञात काल से नाना जातियाँ आ-आकर इस देश में बसती रही हैं और इसकी साधना को नाना भाव से मोड़ती रही हैं, नाना रूप देती रहीं हैं और समृद्ध करती रही हैं। इस देश का सबसे पुराना उपलब्ध साहित्य आर्यों का है। इन्हीं आर्यों के धर्म और विश्वास नाना अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियों में बनते-बदलते अब तक इस देश की अधिकांश जनता के निजी धर्म और विश्वास बने हुए हैं। परन्तु आर्यों का साहित्य कितना भी पुराना और विशाल क्यों न हो भारतवर्ष के समूचे जन-समूह के विकास अध्ययन के लिए न तो वह पर्याप्त ही और न अविसंवादी। इस देश में बहुत-सी आर्येतर जातियाँ अत्यंत सभ्य और संस्कृत जीवन व्यतीत करती थीं, बहुत-सी ऐसी भी थीं जिनके आचार-विचार में जंगलीपन का प्राधान्य था। संघर्ष में पड़कर आर्यों को दोनों प्रकार की जातियों से प्रभावित होना पड़ा। भारत की आर्येतर जातियों के बारे में लेखक कहता है–
The ratio of the ages of Deepika and her mother is 3 : 11. After 3 years the ratio of their ages becomes 1:3. What is the age of Deepika.
Explanations:
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