Correct Answer:
Option C - दिव्यावदान और आर्यमंजूश्रीमूलकल्प, बौद्ध ग्रंथों की रचना संस्कृत भाषा में की गई। दिव्यावदान (चतुर्थ शताब्दी) में बुद्ध और मौर्य सम्राट अशोक से ज़ुडी कथाएं संकलित हैं।
आर्यमंजूश्रीमूलकल्प संस्कृत भाषा में लिखा गया भारतीय बौद्ध तंत्र का एक प्राचीनतम ग्रंथ है। श्रीलंका की पालि बौद्ध रचनाओं में दीपवंश (चौथी-पाँचवी शताब्दी) तथा महावंश (पाँचवी शताब्दी) ऐतिहासिक और मिथकीय विषय का मिश्रण है जिनमें बुद्ध की जीवन कथा, बौद्ध संगीतिया, अशोक, श्रीलंका के राजवंश तथा बौद्ध धर्म का श्रीलंका में आगमन जैसे विषयों का वर्णन है।
C. दिव्यावदान और आर्यमंजूश्रीमूलकल्प, बौद्ध ग्रंथों की रचना संस्कृत भाषा में की गई। दिव्यावदान (चतुर्थ शताब्दी) में बुद्ध और मौर्य सम्राट अशोक से ज़ुडी कथाएं संकलित हैं।
आर्यमंजूश्रीमूलकल्प संस्कृत भाषा में लिखा गया भारतीय बौद्ध तंत्र का एक प्राचीनतम ग्रंथ है। श्रीलंका की पालि बौद्ध रचनाओं में दीपवंश (चौथी-पाँचवी शताब्दी) तथा महावंश (पाँचवी शताब्दी) ऐतिहासिक और मिथकीय विषय का मिश्रण है जिनमें बुद्ध की जीवन कथा, बौद्ध संगीतिया, अशोक, श्रीलंका के राजवंश तथा बौद्ध धर्म का श्रीलंका में आगमन जैसे विषयों का वर्णन है।