Correct Answer:
Option D - दिये गये प्रश्न में दो फकीर शहर आशोब गाते हुए हाल में प्रवेश करते हैं, और स्टेज पर जाते हैं, कफनी पहने हुए एक हाथ में ‘कश्कोल’ और ‘तस्बीह’।
आगरा बाजार नाटक की उपरोक्त पंक्तियों में कश्कोल का अर्थ ‘भिक्षा पात्र’ है।
आगरा बाजार हबीब तनवीर द्वारा सन् 1954 ई. में रचित नाटक है।
हबीब तनवीर के अन्य नाटक - शतरंज के मोहरे, मिट्टी की गाड़ी, चरणदास चोर, उत्तर राम चरित्र, बहादुर कलारिन, जहरीली हवा, देख रहे हैं न्याय इत्यादि।
D. दिये गये प्रश्न में दो फकीर शहर आशोब गाते हुए हाल में प्रवेश करते हैं, और स्टेज पर जाते हैं, कफनी पहने हुए एक हाथ में ‘कश्कोल’ और ‘तस्बीह’।
आगरा बाजार नाटक की उपरोक्त पंक्तियों में कश्कोल का अर्थ ‘भिक्षा पात्र’ है।
आगरा बाजार हबीब तनवीर द्वारा सन् 1954 ई. में रचित नाटक है।
हबीब तनवीर के अन्य नाटक - शतरंज के मोहरे, मिट्टी की गाड़ी, चरणदास चोर, उत्तर राम चरित्र, बहादुर कलारिन, जहरीली हवा, देख रहे हैं न्याय इत्यादि।