Correct Answer:
Option B - बकरी-नाटक में आए गीतों की पंक्तियोंं का पहले से बाद का क्रम निम्नलिखित है-
(i) जा-जा के सींच आएगी हर एक की क्यारी मर कर के भी बुझाएगी वह प्यास तुम्हारी।
(ii) उह करी न अह करी गाँधी जी की बकरी,
हर किला फतह करी गाँधी की बकरी।
(iii) तन मन धन उन्नायक जय हे जय जय बकरी माता,
अन्याय हिंसा दंभ व्रूâरता भुला, करै मन चंगा।
(iv) धर्म ईश्वर, भाग्य सबकी उँगलियों से घूमता,
आदमी मिट्टी का लोदा चाक पर है झूमता।
(v) दुर्जन के साथ सबका यहाँ मोल कर चलो।
* ‘बकरी’ सर्वेश्वरदयाल सक्सेना का नाटक है, इसका प्रकाशन 1974 ई. में हुआ। सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जनवादी नाटककार हैंं इनके नाटक लोक नाट्य शैली में आबद्ध हैं। ‘लड़ाई’ नाटक इनकी एक कहानी का नाट्य-रूपान्तर है। इनका एक अन्य नाटक ‘अब गरीबी हटाओ’ भी है।
B. बकरी-नाटक में आए गीतों की पंक्तियोंं का पहले से बाद का क्रम निम्नलिखित है-
(i) जा-जा के सींच आएगी हर एक की क्यारी मर कर के भी बुझाएगी वह प्यास तुम्हारी।
(ii) उह करी न अह करी गाँधी जी की बकरी,
हर किला फतह करी गाँधी की बकरी।
(iii) तन मन धन उन्नायक जय हे जय जय बकरी माता,
अन्याय हिंसा दंभ व्रूâरता भुला, करै मन चंगा।
(iv) धर्म ईश्वर, भाग्य सबकी उँगलियों से घूमता,
आदमी मिट्टी का लोदा चाक पर है झूमता।
(v) दुर्जन के साथ सबका यहाँ मोल कर चलो।
* ‘बकरी’ सर्वेश्वरदयाल सक्सेना का नाटक है, इसका प्रकाशन 1974 ई. में हुआ। सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जनवादी नाटककार हैंं इनके नाटक लोक नाट्य शैली में आबद्ध हैं। ‘लड़ाई’ नाटक इनकी एक कहानी का नाट्य-रूपान्तर है। इनका एक अन्य नाटक ‘अब गरीबी हटाओ’ भी है।