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Q: विकास के विषय में कौन-सा वक्तव्य सही है- (i) विकास की गति में व्यक्तिगत विभिन्नताएँ होती हैं। (ii) संज्ञानात्मक विकास पूर्णत: आनुवंशिकता द्वारा निर्धारित होता है। (iii) विकास पूर्वनिर्धारित क्रम में होता है। (iv) विकास के सभी पक्ष-क्षेत्र परस्पर संबंधित हैं।
  • A. (i), (ii) और (iii)
  • B. (i), (ii) और (iv)
  • C. (i), (iii) और (iv)
  • D. (i), (ii), (iii) और (iv)
Correct Answer: Option C - विकास के विषय में निम्नलिखित वक्तव्य सही है– (i) विकास की गति में व्यक्तिगत विभिन्नताएँ होती हैं इसलिए प्रत्येक व्यक्ति अपनी गति एवं अपने ढंग से विभिन्न क्षेत्रों में अपना विकास करता है। (ii) विकास पूर्वनिर्धारित क्रम में होता है अर्थात् विकास निश्चित एवं पूर्वनिर्धारित क्रम जैसे मस्तकाधोमुखी क्रम (मस्तिष्क से पैर की ओर) तथा सामीप्यता का सिद्धान्त (निकट से दूर की ओर) का अनुसरण करता है। (iii) विकास के सभी पक्ष, क्षेत्र परस्पर संबंधित होते हैं अर्थात् बालक पहले सम्पूर्ण अंगों को तथा फिर उस अंग के विभिन्न भागों को चलाना सीखता है और फिर इन समस्त भागों में समन्वय स्थापित करना सीखता है। संज्ञानात्मक विकास पूर्णत: आनुवंशिकता द्वारा निर्धारित न होकर वातावरण द्वारा भी प्रभावित होता है क्योंकि विकास आनुवंशिकता एवं वातावरण की परस्पर अन्त:क्रिया का परिणाम होता है।
C. विकास के विषय में निम्नलिखित वक्तव्य सही है– (i) विकास की गति में व्यक्तिगत विभिन्नताएँ होती हैं इसलिए प्रत्येक व्यक्ति अपनी गति एवं अपने ढंग से विभिन्न क्षेत्रों में अपना विकास करता है। (ii) विकास पूर्वनिर्धारित क्रम में होता है अर्थात् विकास निश्चित एवं पूर्वनिर्धारित क्रम जैसे मस्तकाधोमुखी क्रम (मस्तिष्क से पैर की ओर) तथा सामीप्यता का सिद्धान्त (निकट से दूर की ओर) का अनुसरण करता है। (iii) विकास के सभी पक्ष, क्षेत्र परस्पर संबंधित होते हैं अर्थात् बालक पहले सम्पूर्ण अंगों को तथा फिर उस अंग के विभिन्न भागों को चलाना सीखता है और फिर इन समस्त भागों में समन्वय स्थापित करना सीखता है। संज्ञानात्मक विकास पूर्णत: आनुवंशिकता द्वारा निर्धारित न होकर वातावरण द्वारा भी प्रभावित होता है क्योंकि विकास आनुवंशिकता एवं वातावरण की परस्पर अन्त:क्रिया का परिणाम होता है।

Explanations:

विकास के विषय में निम्नलिखित वक्तव्य सही है– (i) विकास की गति में व्यक्तिगत विभिन्नताएँ होती हैं इसलिए प्रत्येक व्यक्ति अपनी गति एवं अपने ढंग से विभिन्न क्षेत्रों में अपना विकास करता है। (ii) विकास पूर्वनिर्धारित क्रम में होता है अर्थात् विकास निश्चित एवं पूर्वनिर्धारित क्रम जैसे मस्तकाधोमुखी क्रम (मस्तिष्क से पैर की ओर) तथा सामीप्यता का सिद्धान्त (निकट से दूर की ओर) का अनुसरण करता है। (iii) विकास के सभी पक्ष, क्षेत्र परस्पर संबंधित होते हैं अर्थात् बालक पहले सम्पूर्ण अंगों को तथा फिर उस अंग के विभिन्न भागों को चलाना सीखता है और फिर इन समस्त भागों में समन्वय स्थापित करना सीखता है। संज्ञानात्मक विकास पूर्णत: आनुवंशिकता द्वारा निर्धारित न होकर वातावरण द्वारा भी प्रभावित होता है क्योंकि विकास आनुवंशिकता एवं वातावरण की परस्पर अन्त:क्रिया का परिणाम होता है।