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The Book 'Fatwa-E-Alamgiri' written in Aurangzeb's time is related to औरंगजेब के समय में लिखी गयी पुस्तक ‘फतवा-ए-आलमगीरी’ का सम्बन्ध है–
The moment of Inertia of a triangular section of height 'h' and base 'b', about its base is : एक त्रिभुजाकार काट, जिसकी ऊँचाई h तथा आधार b हैं, का इसके आधार के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण होगा:
अर्ध उबालने का (पारबाइलींग) का मुख्य कारण है
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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। (9-15) इस संसार में सब कुछ अस्थायी है। पाप और पुण्य दोनों इस संसार से संबंधित हैं, इसलिए पाप और पुण्य भी अस्थायी हैं। पुण्य सुख देकर और पाप दुख देकर अंत को प्राप्त होता है। लेकिन पाप और पुण्य में थोड़ा अंतर यह है कि पुण्य का फल यदि हम नहीं चाहते तो उस फल को अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। पाप लोहे की जंजीर है जो पुण्य सोने की। बंधन दोनों में है। लोहे की जंजीर से छूटने का आदमी का मन भी करता है लेकिन सोने की जंजीर से जो बंधा हुआ हो उसको वह बंधन प्यारा लगने लगता है। उसमें उसको धन नजर आता है उससे छूटने का मन नहीं करता। समूह से भिन्न शब्द है :
Select the correct option that indicates the arrangement of the following words in a logical and meaningful order. 1. Cockroach 2. Owl 3. Ant 4. Horse 5. Fox
The instrument used for checking out right angles is known as ______.
Taxila was capital of which among the 16 Mahajanapadas?
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए। स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं। वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो। चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है। आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है। इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है। व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है। यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है। चरित्र की रक्षा का अर्थ है–काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना। स्वास्थ्य का सहोदर है
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