Correct Answer:
Option B - ‘येषां न विद्या न तपो न दानं...........मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति’।। अस्मिन् श्लोके ‘मृगा:’ इति पदस्यार्थ: ‘पशव:’ अस्ति। येषां न विद्या...........मृगाश्चरन्ति।।’’ इस श्लोक में ‘मृगा:’ का अर्थ ‘पशु है।’
श्लोक का अर्थ है- ‘जिनके पास न विद्या, न तप, न दान, न ज्ञान, न शील, न गुण और न धर्म है, वे मत्र्यलोक में मनुष्य के रूप में पशु के समान विचरण करते हैं।
B. ‘येषां न विद्या न तपो न दानं...........मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति’।। अस्मिन् श्लोके ‘मृगा:’ इति पदस्यार्थ: ‘पशव:’ अस्ति। येषां न विद्या...........मृगाश्चरन्ति।।’’ इस श्लोक में ‘मृगा:’ का अर्थ ‘पशु है।’
श्लोक का अर्थ है- ‘जिनके पास न विद्या, न तप, न दान, न ज्ञान, न शील, न गुण और न धर्म है, वे मत्र्यलोक में मनुष्य के रूप में पशु के समान विचरण करते हैं।