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Q: ‘येनाङ्गविकार:’ सूत्र है–
  • A. कर्म (द्वितीया) कारक का
  • B. करण (तृतीया) कारक का
  • C. सम्प्रदान (चतुर्थी) कारक का
  • D. अपादान (पञ्चमी) कारक का
Correct Answer: Option B - येनाङ्गविकार:- जिस विकृत अङ्ग से अङ्गी का विकार लक्षित हो, उससे अर्थात् उसके वाचक शब्द से तृतीया होती है। जैसे – ‘अक्ष्णा काण:’। यहाँ आँख रूप विकृत अङ्ग से ‘अन्धे’ रूप अङ्गी का बोध हो रहा है। अत: यहाँ आँख में तृतीया विभक्ति हुई है।
B. येनाङ्गविकार:- जिस विकृत अङ्ग से अङ्गी का विकार लक्षित हो, उससे अर्थात् उसके वाचक शब्द से तृतीया होती है। जैसे – ‘अक्ष्णा काण:’। यहाँ आँख रूप विकृत अङ्ग से ‘अन्धे’ रूप अङ्गी का बोध हो रहा है। अत: यहाँ आँख में तृतीया विभक्ति हुई है।

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येनाङ्गविकार:- जिस विकृत अङ्ग से अङ्गी का विकार लक्षित हो, उससे अर्थात् उसके वाचक शब्द से तृतीया होती है। जैसे – ‘अक्ष्णा काण:’। यहाँ आँख रूप विकृत अङ्ग से ‘अन्धे’ रूप अङ्गी का बोध हो रहा है। अत: यहाँ आँख में तृतीया विभक्ति हुई है।