Correct Answer:
Option C - महर्षि पंतजलि के अनुसार आंतरिक शुद्धिकरण में आठ (8) योग को बताया गया है जिसके कारण इसे ‘‘अष्टांग’’ भी कहा जाता है। इन आठ योगों में एक ‘‘याम योग’’ है।
यम का अर्थ है चित्त को धर्म में स्थित रखने के साधन ये पाँच हैं–
1. अंहिसा – मन, वचन व कर्म द्वारा किसी भी प्राणी को किसी तरह का कष्ट न पहुँचाने की भावना अंहिसा है।
2. सत्य – जैसा मन में समझा, आँखों ने देखा, कानों ने सुना, वैसा कह देना सत्य है।
3. अस्तेय – मन, वचन, कर्म से चोरी न करना व धन का लालच न करना।
4. ब्रह्मचर्य – मन, वाणी और शरीर से यौनिक सुख प्राप्त न करना, बह्मचर्य है।
5. अपरिग्रह – अनायास प्राप्त हुए सुख के साधनों का त्याग करना अपरिग्रह है।
C. महर्षि पंतजलि के अनुसार आंतरिक शुद्धिकरण में आठ (8) योग को बताया गया है जिसके कारण इसे ‘‘अष्टांग’’ भी कहा जाता है। इन आठ योगों में एक ‘‘याम योग’’ है।
यम का अर्थ है चित्त को धर्म में स्थित रखने के साधन ये पाँच हैं–
1. अंहिसा – मन, वचन व कर्म द्वारा किसी भी प्राणी को किसी तरह का कष्ट न पहुँचाने की भावना अंहिसा है।
2. सत्य – जैसा मन में समझा, आँखों ने देखा, कानों ने सुना, वैसा कह देना सत्य है।
3. अस्तेय – मन, वचन, कर्म से चोरी न करना व धन का लालच न करना।
4. ब्रह्मचर्य – मन, वाणी और शरीर से यौनिक सुख प्राप्त न करना, बह्मचर्य है।
5. अपरिग्रह – अनायास प्राप्त हुए सुख के साधनों का त्याग करना अपरिग्रह है।