Correct Answer:
Option B - पियाजे के नैतिक विकास की अवस्थाओं के सन्दर्भ में -
(1) प्रीमोरल अवस्था - पियाजे के सिद्धान्त के अनुसार प्री-मोरल अवस्था 0-5 वर्ष तक की होती है। इस चरण में बच्चों में कोई अनुशासन (Rule) की समझ नहीं होती हैै तथा उनके लिए मानसिक संचालन (Mental operation) करना भी मुश्किल होता है।
(2) मोरल रियलाइस्म- पियाजे के सिद्धान्त के अनुसार यह अवस्था प्री मोरल अवस्था के बाद की अवस्था होती है। जो 5 से 10 वर्ष तक की होती है। इस अवस्था में बालक यह नैतिक निर्णय लेता है कि कौन से कार्य सही है और कौन से गलत है, तथा कौन-सी चीजें अच्छी है और कौन सी बुरी।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि उपरोक्त दोनों कथनो के आधार पर यहाँ कथन I व कथन II दोनों उचित कथन है।
B. पियाजे के नैतिक विकास की अवस्थाओं के सन्दर्भ में -
(1) प्रीमोरल अवस्था - पियाजे के सिद्धान्त के अनुसार प्री-मोरल अवस्था 0-5 वर्ष तक की होती है। इस चरण में बच्चों में कोई अनुशासन (Rule) की समझ नहीं होती हैै तथा उनके लिए मानसिक संचालन (Mental operation) करना भी मुश्किल होता है।
(2) मोरल रियलाइस्म- पियाजे के सिद्धान्त के अनुसार यह अवस्था प्री मोरल अवस्था के बाद की अवस्था होती है। जो 5 से 10 वर्ष तक की होती है। इस अवस्था में बालक यह नैतिक निर्णय लेता है कि कौन से कार्य सही है और कौन से गलत है, तथा कौन-सी चीजें अच्छी है और कौन सी बुरी।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि उपरोक्त दोनों कथनो के आधार पर यहाँ कथन I व कथन II दोनों उचित कथन है।