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Q: Who were Mattamayurs? / `मत्तमयूर' कौन थे -
  • A. Followers of Bhagwat sect/भागवत धर्म के अनुयायी
  • B. Followers of Shaivism/शैव अनुयायी
  • C. Jain Followers/जैन अनुयायी
  • D. Ajivakas/आजीवक
Correct Answer: Option B - मत्तमयूर शैव अनुयायी थे। शैव धर्म के प्रचारकों को नायनार कहा गया है। नायनार सन्तों की संख्या 63 बताई गयी है, जिनमें अप्पार, तिरुज्ञान, सम्बन्दर सुन्दर मूर्ति, मणिक्कवाचगर आदि के नाम लिए जा सकते हैं। इसमें सुन्दर मूर्ति को `ईश्वर मिश्र' की उपाधि दी गयी थी। इसी प्रकार अनेक चोल शासकों ने भी शैव धर्म के उत्थान पर बल दिया था। मत्तमयूर प्राचीन भारत में शैव सम्प्रदाय था जिसका उल्लेख चेदि वंश के अभिलेखों में मिलता है।
B. मत्तमयूर शैव अनुयायी थे। शैव धर्म के प्रचारकों को नायनार कहा गया है। नायनार सन्तों की संख्या 63 बताई गयी है, जिनमें अप्पार, तिरुज्ञान, सम्बन्दर सुन्दर मूर्ति, मणिक्कवाचगर आदि के नाम लिए जा सकते हैं। इसमें सुन्दर मूर्ति को `ईश्वर मिश्र' की उपाधि दी गयी थी। इसी प्रकार अनेक चोल शासकों ने भी शैव धर्म के उत्थान पर बल दिया था। मत्तमयूर प्राचीन भारत में शैव सम्प्रदाय था जिसका उल्लेख चेदि वंश के अभिलेखों में मिलता है।

Explanations:

मत्तमयूर शैव अनुयायी थे। शैव धर्म के प्रचारकों को नायनार कहा गया है। नायनार सन्तों की संख्या 63 बताई गयी है, जिनमें अप्पार, तिरुज्ञान, सम्बन्दर सुन्दर मूर्ति, मणिक्कवाचगर आदि के नाम लिए जा सकते हैं। इसमें सुन्दर मूर्ति को `ईश्वर मिश्र' की उपाधि दी गयी थी। इसी प्रकार अनेक चोल शासकों ने भी शैव धर्म के उत्थान पर बल दिया था। मत्तमयूर प्राचीन भारत में शैव सम्प्रदाय था जिसका उल्लेख चेदि वंश के अभिलेखों में मिलता है।