Correct Answer:
Option C - महावीर स्वामी का नाम वर्धमान था। 30 वर्ष की अवस्था में ये घर त्याग कर तपस्या करने निकल पड़े। 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद वैशाख मास के 10वें दिन जृम्भिक ग्राम के पास ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे उन्हें कैवल्य (ज्ञान) की प्राप्ति हुई। ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ‘केवलिन’, ‘जिन’ (विजेता), अर्हत् (योग्य) तथा ‘निग्रन्थ’ (बन्धन रहित) कहलाये। महावीर स्वामी ने अपने उपदेशों के प्रचार के लिए प्राकृत एवं अर्द्धमागधी भाषाओं का प्रयोग किया।
C. महावीर स्वामी का नाम वर्धमान था। 30 वर्ष की अवस्था में ये घर त्याग कर तपस्या करने निकल पड़े। 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद वैशाख मास के 10वें दिन जृम्भिक ग्राम के पास ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे उन्हें कैवल्य (ज्ञान) की प्राप्ति हुई। ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ‘केवलिन’, ‘जिन’ (विजेता), अर्हत् (योग्य) तथा ‘निग्रन्थ’ (बन्धन रहित) कहलाये। महावीर स्वामी ने अपने उपदेशों के प्रचार के लिए प्राकृत एवं अर्द्धमागधी भाषाओं का प्रयोग किया।