search
Q: Pine, fir, spruce, cedar, larch and cypress are the famous timber-yielding plants of which several also occur widely in the hilly regions of India. All these belongs to देवदार, फर, स्प्रूस, लार्च और सरू के प्रसिद्ध लकड़ी के पौधें हैं, कई पहाड़ी क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से पाए जाते है। ये सभी संबंधित है-
  • A. Angiospersms/एंजियोस्पर्म
  • B. Gymnosperms/जिम्नोस्पर्म
  • C. Monocotyledons/मोनोकॉटीलेडन
  • D. Dicotyledons/डाइ कॉटीलेडन
Correct Answer: Option B - अनावृतबीजी’ (Gymnosperm) ऐसे पौधों और वृक्षों को कहा जाता है जिनके बीज फूलो में पनपने और फलों में बन्द होने के बजाय छोटी टहनियों या शंकुओं में खुली अवस्था में होते है। यह दशा ‘आवृतबीजी’ (Angiosperm) वनस्पतियों से विपरीत होती है जिन पर फूल आते हैं और उनके बीज अक्सर फलों के अन्दर रहकर पनपते है। अनावृतबीजी वृक्षों का सबसे बड़ा उदाहरण कोणधारी पौधे है, जिनकी श्रेणी में अल्पाइन, देवदार, स्प्रूस लार्च, साइप्रस आदि आते है। ऐसे पौधे उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों में पाये जाते हैं।
B. अनावृतबीजी’ (Gymnosperm) ऐसे पौधों और वृक्षों को कहा जाता है जिनके बीज फूलो में पनपने और फलों में बन्द होने के बजाय छोटी टहनियों या शंकुओं में खुली अवस्था में होते है। यह दशा ‘आवृतबीजी’ (Angiosperm) वनस्पतियों से विपरीत होती है जिन पर फूल आते हैं और उनके बीज अक्सर फलों के अन्दर रहकर पनपते है। अनावृतबीजी वृक्षों का सबसे बड़ा उदाहरण कोणधारी पौधे है, जिनकी श्रेणी में अल्पाइन, देवदार, स्प्रूस लार्च, साइप्रस आदि आते है। ऐसे पौधे उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों में पाये जाते हैं।

Explanations:

अनावृतबीजी’ (Gymnosperm) ऐसे पौधों और वृक्षों को कहा जाता है जिनके बीज फूलो में पनपने और फलों में बन्द होने के बजाय छोटी टहनियों या शंकुओं में खुली अवस्था में होते है। यह दशा ‘आवृतबीजी’ (Angiosperm) वनस्पतियों से विपरीत होती है जिन पर फूल आते हैं और उनके बीज अक्सर फलों के अन्दर रहकर पनपते है। अनावृतबीजी वृक्षों का सबसे बड़ा उदाहरण कोणधारी पौधे है, जिनकी श्रेणी में अल्पाइन, देवदार, स्प्रूस लार्च, साइप्रस आदि आते है। ऐसे पौधे उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों में पाये जाते हैं।