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Q: Who was the first woman to became a Chief Election Commissioner of India? भारत की प्रथम महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त कौन थीं?
  • A. R.M. Nikam/आर. एम. निकम
  • B. S.K. Bedi/एस. के. बेदी
  • C. V.S. Ramadevi/वी. एस. रमादेवी
  • D. G.D. das/जी. डी. दास
Correct Answer: Option C - अनुच्छेद-324 (2) के अनुसार भारत के निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य आयुक्त जिनकी संख्या राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करे, बनेगा (संख्या संविधान द्वारा तय नहीं)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले) होता है। वे किसी भी समय त्याग पत्र दे सकते हैं। उन्हें कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व भी हटाया जा सकता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल उसी रीति और आधारों से हटाया जा सकता है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को, शेष आयुक्तों को राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश से हटा सकते हैं। शक्ति एवं कार्य- संसद, राज्य के विधानमंडल, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचन के संदर्भ में चुनाव आयोग की शक्ति व कार्यों को तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है- (1. प्रशासनिक, 2. सलाहकारी, 3. अर्द्ध -न्यायिक)। • निर्वाचक-नामावली तैयार करना व मतदाताओं का पंजीकरण (प्रत्येक वर्ष)। • निर्वाचन की तिथि और समय-सारिणी का निर्धारण। • राजनीतिक दलों को मान्यता व निर्वाचन चिन्ह प्रदान करना व इस संबंध में हुए विवाद के समाधान के लिए न्यायालय की तरह काम करना। • आचार-संहिता का निर्माण करना। • शांतिपूर्ण, स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना। • अनुच्छेद 324(6) के अनुसार, निर्वाचन आयोग निर्वाचन कराने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता के बारे में राष्ट्रपति या राज्यपाल से आग्रह करता है राष्ट्रपति या राज्यपाल कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं। • वर्तमान में राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन तथा पहली महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त वी. एस. रमादेवी थीं।
C. अनुच्छेद-324 (2) के अनुसार भारत के निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य आयुक्त जिनकी संख्या राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करे, बनेगा (संख्या संविधान द्वारा तय नहीं)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले) होता है। वे किसी भी समय त्याग पत्र दे सकते हैं। उन्हें कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व भी हटाया जा सकता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल उसी रीति और आधारों से हटाया जा सकता है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को, शेष आयुक्तों को राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश से हटा सकते हैं। शक्ति एवं कार्य- संसद, राज्य के विधानमंडल, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचन के संदर्भ में चुनाव आयोग की शक्ति व कार्यों को तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है- (1. प्रशासनिक, 2. सलाहकारी, 3. अर्द्ध -न्यायिक)। • निर्वाचक-नामावली तैयार करना व मतदाताओं का पंजीकरण (प्रत्येक वर्ष)। • निर्वाचन की तिथि और समय-सारिणी का निर्धारण। • राजनीतिक दलों को मान्यता व निर्वाचन चिन्ह प्रदान करना व इस संबंध में हुए विवाद के समाधान के लिए न्यायालय की तरह काम करना। • आचार-संहिता का निर्माण करना। • शांतिपूर्ण, स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना। • अनुच्छेद 324(6) के अनुसार, निर्वाचन आयोग निर्वाचन कराने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता के बारे में राष्ट्रपति या राज्यपाल से आग्रह करता है राष्ट्रपति या राज्यपाल कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं। • वर्तमान में राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन तथा पहली महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त वी. एस. रमादेवी थीं।

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अनुच्छेद-324 (2) के अनुसार भारत के निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य आयुक्त जिनकी संख्या राष्ट्रपति समय-समय पर नियत करे, बनेगा (संख्या संविधान द्वारा तय नहीं)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले) होता है। वे किसी भी समय त्याग पत्र दे सकते हैं। उन्हें कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व भी हटाया जा सकता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल उसी रीति और आधारों से हटाया जा सकता है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को, शेष आयुक्तों को राष्ट्रपति मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश से हटा सकते हैं। शक्ति एवं कार्य- संसद, राज्य के विधानमंडल, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचन के संदर्भ में चुनाव आयोग की शक्ति व कार्यों को तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है- (1. प्रशासनिक, 2. सलाहकारी, 3. अर्द्ध -न्यायिक)। • निर्वाचक-नामावली तैयार करना व मतदाताओं का पंजीकरण (प्रत्येक वर्ष)। • निर्वाचन की तिथि और समय-सारिणी का निर्धारण। • राजनीतिक दलों को मान्यता व निर्वाचन चिन्ह प्रदान करना व इस संबंध में हुए विवाद के समाधान के लिए न्यायालय की तरह काम करना। • आचार-संहिता का निर्माण करना। • शांतिपूर्ण, स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना। • अनुच्छेद 324(6) के अनुसार, निर्वाचन आयोग निर्वाचन कराने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता के बारे में राष्ट्रपति या राज्यपाल से आग्रह करता है राष्ट्रपति या राज्यपाल कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं। • वर्तमान में राजीव कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन तथा पहली महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त वी. एस. रमादेवी थीं।