Correct Answer:
Option D - बादशाह अकबर ने वजीर पर नियंत्रण रखने के लिए कई दीवानों की नियुक्ति की थी। इसमें पहला, ‘दीवान-ए-खालसा’ था जो साम्राज्य की खालसा भूमि का प्रबन्ध करता था। दूसरा, ‘दीवान-ए-तन’ था जो जागीरें एवं वेतन संबंधी कार्यों की देख-रेख करता था। तीसरा, ‘दीवान-ए-बयूतात’ था जो विभिन्न कारखानों के आय-व्यय का ब्यौरा रखता था। दीवान-ए-तबजिह सैनिकों का लेखा जोखा रखता था। केन्द्रीय राजकोष की देख-भाल ‘मुशरिफ-ए-खजाना’ नामक अधिकारी द्वारा होता था।
D. बादशाह अकबर ने वजीर पर नियंत्रण रखने के लिए कई दीवानों की नियुक्ति की थी। इसमें पहला, ‘दीवान-ए-खालसा’ था जो साम्राज्य की खालसा भूमि का प्रबन्ध करता था। दूसरा, ‘दीवान-ए-तन’ था जो जागीरें एवं वेतन संबंधी कार्यों की देख-रेख करता था। तीसरा, ‘दीवान-ए-बयूतात’ था जो विभिन्न कारखानों के आय-व्यय का ब्यौरा रखता था। दीवान-ए-तबजिह सैनिकों का लेखा जोखा रखता था। केन्द्रीय राजकोष की देख-भाल ‘मुशरिफ-ए-खजाना’ नामक अधिकारी द्वारा होता था।