Correct Answer:
Option B - ऋग्वैदिक आर्यों का प्रारम्भिक जीवन कबायली था अत: उनके देवता भी प्राकृतिक शक्तियों के प्रतीक थे। यास्क ने अपने ग्रंथ निरूक्त में ऋग्वेदिक देवताओं की मण्डली बनायी है जिनकी संख्या 33 है। इन्हें आकाश, अन्तरिक्ष एवं पृथ्वी के देवता के रूप में विभाजित किया गया है। रूद्र का अन्तरिक्ष के देवताओं में प्रमुख स्थान है। रुद्र को अन्य देवताओं की तरह बलि की भेंट नहीं दी जाती थी। ऋग्वेद के 3 सूक्तोें में इनका वर्णन है। इनका स्वभाव क्रोधी है तथा इन्हें शिव का प्रारम्भिक रूप माना जाता है।
B. ऋग्वैदिक आर्यों का प्रारम्भिक जीवन कबायली था अत: उनके देवता भी प्राकृतिक शक्तियों के प्रतीक थे। यास्क ने अपने ग्रंथ निरूक्त में ऋग्वेदिक देवताओं की मण्डली बनायी है जिनकी संख्या 33 है। इन्हें आकाश, अन्तरिक्ष एवं पृथ्वी के देवता के रूप में विभाजित किया गया है। रूद्र का अन्तरिक्ष के देवताओं में प्रमुख स्थान है। रुद्र को अन्य देवताओं की तरह बलि की भेंट नहीं दी जाती थी। ऋग्वेद के 3 सूक्तोें में इनका वर्णन है। इनका स्वभाव क्रोधी है तथा इन्हें शिव का प्रारम्भिक रूप माना जाता है।