Correct Answer:
Option A - 6वीं शताब्दी ईस्वी के प्रारम्भ में पुष्यभूति ने वर्धन राजवंश की स्थापना की। वस्तुत: थानेश्वर के राजवंश का संस्थापक नरवर्धन ही था। उसी के समय से इस वंश के राजाओं के नाम के अंत में वर्धन शब्द जुड़ा मिलता है। इसी कारण यह वंश वर्धन वंश के नाम से प्रसिद्ध है। बासखेड़ा तथा मधुबन के अभिलेखों एवं सोनपत और नालंदा से प्राप्त मुद्रा से वर्धन वंश के निम्नलिखित राजाओं के नाम प्राप्त होते हैं- (1) नरवर्धन, (2) राज्यवर्धन (3) आदित्यवर्धन एवं प्रभाकरवर्धन। पुष्यभूति वंश का पहला राजा नरवर्धन ही था। इस वंश का प्रमुख शासक हर्षवर्धन था।
A. 6वीं शताब्दी ईस्वी के प्रारम्भ में पुष्यभूति ने वर्धन राजवंश की स्थापना की। वस्तुत: थानेश्वर के राजवंश का संस्थापक नरवर्धन ही था। उसी के समय से इस वंश के राजाओं के नाम के अंत में वर्धन शब्द जुड़ा मिलता है। इसी कारण यह वंश वर्धन वंश के नाम से प्रसिद्ध है। बासखेड़ा तथा मधुबन के अभिलेखों एवं सोनपत और नालंदा से प्राप्त मुद्रा से वर्धन वंश के निम्नलिखित राजाओं के नाम प्राप्त होते हैं- (1) नरवर्धन, (2) राज्यवर्धन (3) आदित्यवर्धन एवं प्रभाकरवर्धन। पुष्यभूति वंश का पहला राजा नरवर्धन ही था। इस वंश का प्रमुख शासक हर्षवर्धन था।