Correct Answer:
Option B - अठ्ठारहवीं शताब्दी के जर्मन दार्शनिक इमैनुअल काण्ट (1724–1804 ई.) को अपवादवाद का प्रवर्तक माना जाता है काण्ट 1756 ई. से लेकर 1796 ई. तक लगातार 40 वर्षों तक प्रतिवर्ष भौतिक भूगोल शीर्षक से एक पाठ्यक्रम प्रस्तुत करते थे। अपवादवाद को प्रतिपादित करते हुए काण्ट ने बताया कि इतिहास और भूगोल दोनों अपने को व्यवस्थित या क्रमबद्ध विज्ञानों से भिन्न और अपवाद स्वरूप पाते हैं। क्रमबद्ध विज्ञान विशिष्ट तत्वों या प्रक्रियाओं का व्यवस्थित (क्रमबद्ध) अध्ययन करते हैं। जबकि इतिहास कालिक अध्ययन और भूगोल क्षेत्रीय अध्ययन है।
B. अठ्ठारहवीं शताब्दी के जर्मन दार्शनिक इमैनुअल काण्ट (1724–1804 ई.) को अपवादवाद का प्रवर्तक माना जाता है काण्ट 1756 ई. से लेकर 1796 ई. तक लगातार 40 वर्षों तक प्रतिवर्ष भौतिक भूगोल शीर्षक से एक पाठ्यक्रम प्रस्तुत करते थे। अपवादवाद को प्रतिपादित करते हुए काण्ट ने बताया कि इतिहास और भूगोल दोनों अपने को व्यवस्थित या क्रमबद्ध विज्ञानों से भिन्न और अपवाद स्वरूप पाते हैं। क्रमबद्ध विज्ञान विशिष्ट तत्वों या प्रक्रियाओं का व्यवस्थित (क्रमबद्ध) अध्ययन करते हैं। जबकि इतिहास कालिक अध्ययन और भूगोल क्षेत्रीय अध्ययन है।