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Q: Who among the following was the ‘Political Guru’ of Mahatma Gandhi? महात्मा गाँधी के राजनीतिक गुरू कौन थे─
  • A. C. R. Das/सी. आर. दास
  • B. Dada Bhai Naoroji/दादा भाई नौरोजी
  • C. Tilak/तिलक
  • D. Gopal Krishna Gokhale/गोपाल कृष्ण गोखले
Correct Answer: Option D - गोपाल कृष्ण गोखले ने पहली बार राजनीति में 1889 में इलाहाबाद में हुए कांग्रेस अधिवेशन से प्रवेश किया। गोखले उदारवादी होने के साथ-साथ सच्चे राष्ट्रवादी भी थे। गरम दल के लोगों ने इन्हें `दुर्बल हृदय का सुधारवादी’ एवं अंग्रेजों ने ‘छिपा हुआ राजद्रोही' कहा। इन्होंने 1905 में बनारस में हुए कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता भी की थी। महात्मा गाँधी गोखले के महान व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनको अपना ‘अध्यात्मिक और राजनीतिक गुरू’ माना। गोखले ने ही महात्मा गाँधी को भारतीय राजनीति में प्रवेश से पूर्व एक वर्ष तक देश में पर्यवेक्षक एवं विद्यार्थी के रूप में रहने की सलाह दी थी।
D. गोपाल कृष्ण गोखले ने पहली बार राजनीति में 1889 में इलाहाबाद में हुए कांग्रेस अधिवेशन से प्रवेश किया। गोखले उदारवादी होने के साथ-साथ सच्चे राष्ट्रवादी भी थे। गरम दल के लोगों ने इन्हें `दुर्बल हृदय का सुधारवादी’ एवं अंग्रेजों ने ‘छिपा हुआ राजद्रोही' कहा। इन्होंने 1905 में बनारस में हुए कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता भी की थी। महात्मा गाँधी गोखले के महान व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनको अपना ‘अध्यात्मिक और राजनीतिक गुरू’ माना। गोखले ने ही महात्मा गाँधी को भारतीय राजनीति में प्रवेश से पूर्व एक वर्ष तक देश में पर्यवेक्षक एवं विद्यार्थी के रूप में रहने की सलाह दी थी।

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गोपाल कृष्ण गोखले ने पहली बार राजनीति में 1889 में इलाहाबाद में हुए कांग्रेस अधिवेशन से प्रवेश किया। गोखले उदारवादी होने के साथ-साथ सच्चे राष्ट्रवादी भी थे। गरम दल के लोगों ने इन्हें `दुर्बल हृदय का सुधारवादी’ एवं अंग्रेजों ने ‘छिपा हुआ राजद्रोही' कहा। इन्होंने 1905 में बनारस में हुए कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता भी की थी। महात्मा गाँधी गोखले के महान व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनको अपना ‘अध्यात्मिक और राजनीतिक गुरू’ माना। गोखले ने ही महात्मा गाँधी को भारतीय राजनीति में प्रवेश से पूर्व एक वर्ष तक देश में पर्यवेक्षक एवं विद्यार्थी के रूप में रहने की सलाह दी थी।