Correct Answer:
Option C - फ्रांसिस फुकुयामा ने अपनी पुस्तक The end of History and the last man (1992) में उदारवादी प्रजातंत्र के विश्वव्यापी विजय को ‘इतिहास के अंत’ के रूप में व्याख्यायित किया। फुकुयामा ने कहा कि सोवियत संघ के पतन ने यह बात साबित कर दी है कि उदारवादी लोकतंत्र यह मानव मात्र की विचारधारात्मक उन्नति का अन्तिम बिन्दु है तथा मानव सरकार का भी अन्तिम रूप।
C. फ्रांसिस फुकुयामा ने अपनी पुस्तक The end of History and the last man (1992) में उदारवादी प्रजातंत्र के विश्वव्यापी विजय को ‘इतिहास के अंत’ के रूप में व्याख्यायित किया। फुकुयामा ने कहा कि सोवियत संघ के पतन ने यह बात साबित कर दी है कि उदारवादी लोकतंत्र यह मानव मात्र की विचारधारात्मक उन्नति का अन्तिम बिन्दु है तथा मानव सरकार का भी अन्तिम रूप।