Correct Answer:
Option B - कवक का अध्ययन माइकोलॉजी कहलाता है। कवकों से कई प्रकार के एन्टीबायोटिक औषधियों का निर्माण किया जाता है। 1928 ई. में अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने पेनिसिलियम जीनस से एंटिबायोटिक (पेनिसिलीन) उत्पादक कवक ( फंगस) की खोज की थी। कवकों से प्राप्त औषधियाँ- क्लोरोमाइसीटीन, नियोमाइसीन, टेरामाइसीन आदि। कवक (Fungus) हरित लवक रहित, संवहन ऊतक रहित थैलोफाइटा है। पर्णहरित विहीन होने के कारण कवक अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाता है। अत: ये विविधपोषी होते है। इनकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है।
B. कवक का अध्ययन माइकोलॉजी कहलाता है। कवकों से कई प्रकार के एन्टीबायोटिक औषधियों का निर्माण किया जाता है। 1928 ई. में अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने पेनिसिलियम जीनस से एंटिबायोटिक (पेनिसिलीन) उत्पादक कवक ( फंगस) की खोज की थी। कवकों से प्राप्त औषधियाँ- क्लोरोमाइसीटीन, नियोमाइसीन, टेरामाइसीन आदि। कवक (Fungus) हरित लवक रहित, संवहन ऊतक रहित थैलोफाइटा है। पर्णहरित विहीन होने के कारण कवक अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाता है। अत: ये विविधपोषी होते है। इनकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है।