Correct Answer:
Option C - शंकराचार्य के द्वारा हिन्दू धर्म के प्रबल प्रचार-प्रसार से बौद्ध एवं जैन धर्म को गहरा झटका लगा तथा उनका विलोप हो गया। अपने कार्यों को मूर्तरूप देने के लिए शंकराचार्य ने देश के चारों दिशाओं उत्तर में केदारनाथ (जोशीमठ-विष्णु), दक्षिण में श्रृंगेरी-शिव, पूर्व में पुरी-बलभद्र व सुभद्रा तथा पश्चिम में द्वारका-कृष्ण में प्रसिद्ध मठों की स्थापना की। शंकराचार्य का मत अद्वैतवाद के नाम से विख्यात है। शंकराचार्य ने उपनिषदों, गीता तथा ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखकर अपने मत को पुष्ट आधार प्रदान किया। शंकराचार्य का जन्म केरल (मालाबार तट) के ‘कलादि’ नामक ग्राम अल्वर नदी के किनारे 788 ई. में हुआ था।
C. शंकराचार्य के द्वारा हिन्दू धर्म के प्रबल प्रचार-प्रसार से बौद्ध एवं जैन धर्म को गहरा झटका लगा तथा उनका विलोप हो गया। अपने कार्यों को मूर्तरूप देने के लिए शंकराचार्य ने देश के चारों दिशाओं उत्तर में केदारनाथ (जोशीमठ-विष्णु), दक्षिण में श्रृंगेरी-शिव, पूर्व में पुरी-बलभद्र व सुभद्रा तथा पश्चिम में द्वारका-कृष्ण में प्रसिद्ध मठों की स्थापना की। शंकराचार्य का मत अद्वैतवाद के नाम से विख्यात है। शंकराचार्य ने उपनिषदों, गीता तथा ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखकर अपने मत को पुष्ट आधार प्रदान किया। शंकराचार्य का जन्म केरल (मालाबार तट) के ‘कलादि’ नामक ग्राम अल्वर नदी के किनारे 788 ई. में हुआ था।