Correct Answer:
Option D - भारत की अनेक जातियों और जनजातियों में पीढी दर पीढी चली आ रही पारम्पारिक कलाओं को लोक कला कहते हैै। कलमकारी, दीवार पेटिंग, रंगोली बनाना कौलम बनाना कांगडा, चित्तर, तंजाबुर,थंगक,पाताचित्र पिछाई,पिथोरा चित्रकला, वरली आदि भारत की प्रमुख लोक कलाएँ है।
लोक कला का उद्भव 19 वीं शताब्दी के श्वेत ईसाई सुशिक्षित शहरी लोगों ने देहाती समाजों की विलक्षण कलाओं और शिल्पों का वर्णन करने के लिए किया था।
इस प्रकार स्पष्ट होता है कि यहाँ केवल कथन II ही सही कथन है अत: विकल्प (d) सही विकल्प होगा।
D. भारत की अनेक जातियों और जनजातियों में पीढी दर पीढी चली आ रही पारम्पारिक कलाओं को लोक कला कहते हैै। कलमकारी, दीवार पेटिंग, रंगोली बनाना कौलम बनाना कांगडा, चित्तर, तंजाबुर,थंगक,पाताचित्र पिछाई,पिथोरा चित्रकला, वरली आदि भारत की प्रमुख लोक कलाएँ है।
लोक कला का उद्भव 19 वीं शताब्दी के श्वेत ईसाई सुशिक्षित शहरी लोगों ने देहाती समाजों की विलक्षण कलाओं और शिल्पों का वर्णन करने के लिए किया था।
इस प्रकार स्पष्ट होता है कि यहाँ केवल कथन II ही सही कथन है अत: विकल्प (d) सही विकल्प होगा।