Correct Answer:
Option C - अपघटन कायान्तरण (रुपान्तरण) का कारक नहीं है। आग्नेय (मूल शैल) एवं अवसादी शैले उच्चताप (ऊष्मा), संपीडन (दाब) एवं विलयन (विघटन) के कारण कायांतरित (रुपांतरित) शैलों में परिवर्तित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को कायांतरण कहा जाता है। शैल अधिक समय तक अपने मूल में नहीं रहते वे रूपांतरित होते रहते हैं। जैसे- चूना पत्थर एक अवसादी शैल है जो उच्चताप एवं दाब के कारण रुपांतरित शैल ‘संगमरमर’ में परिवर्तित हो जाती है। कुछ महत्वपूर्ण रुपान्तरित चट्टानें हैं → ग्रेनाइट से नीस, गैब्रो से सरपेंटाइन, बेसाल्ट से शिस्ट, बिटुमिनस से ग्रेफाइट।
C. अपघटन कायान्तरण (रुपान्तरण) का कारक नहीं है। आग्नेय (मूल शैल) एवं अवसादी शैले उच्चताप (ऊष्मा), संपीडन (दाब) एवं विलयन (विघटन) के कारण कायांतरित (रुपांतरित) शैलों में परिवर्तित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को कायांतरण कहा जाता है। शैल अधिक समय तक अपने मूल में नहीं रहते वे रूपांतरित होते रहते हैं। जैसे- चूना पत्थर एक अवसादी शैल है जो उच्चताप एवं दाब के कारण रुपांतरित शैल ‘संगमरमर’ में परिवर्तित हो जाती है। कुछ महत्वपूर्ण रुपान्तरित चट्टानें हैं → ग्रेनाइट से नीस, गैब्रो से सरपेंटाइन, बेसाल्ट से शिस्ट, बिटुमिनस से ग्रेफाइट।