Correct Answer:
Option A - अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा के दोषों को तीन वर्गो में विभाजित कया है-
A. मुद्रा के आर्थिक दोष -
i. साधनों का संकेन्द्रण
ii. वर्ग संघर्ष का उदय
iii. मूल्य में स्थिरता की कमी
iv. अति पूँजीकरण
v. व्यापार चक्र
vi. मुद्रा-स्फीति
B. मुद्रा के सामाजिक दोष -
i. सामाजिक प्रतिष्ठा देने वाला
ii. अधिक शोषण
iii. शत्रुता
iv. कपट
v. हत्या
vi. भ्रष्टाचार
C. मुद्रा के नैतिक दोष -
i. अत्यधिक धन कमाने की लालच
ii. मानवता के खिलाफ प्रयोग
इसलिए कहा जाता है कि मुद्रा का समुचित नियन्त्रण बहुत जरूरी है। इस सम्बन्ध में श्री नेजहॉट ने कहा है कि ‘‘मुद्रा का नियन्त्रण इसलिए आवश्यक है कि यह अपने आपको व्यवस्थित नहीं कर सकती।’’
अत: व्यापार चक्र मुद्रा की सामाजिक बुराई नहीं है।
A. अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा के दोषों को तीन वर्गो में विभाजित कया है-
A. मुद्रा के आर्थिक दोष -
i. साधनों का संकेन्द्रण
ii. वर्ग संघर्ष का उदय
iii. मूल्य में स्थिरता की कमी
iv. अति पूँजीकरण
v. व्यापार चक्र
vi. मुद्रा-स्फीति
B. मुद्रा के सामाजिक दोष -
i. सामाजिक प्रतिष्ठा देने वाला
ii. अधिक शोषण
iii. शत्रुता
iv. कपट
v. हत्या
vi. भ्रष्टाचार
C. मुद्रा के नैतिक दोष -
i. अत्यधिक धन कमाने की लालच
ii. मानवता के खिलाफ प्रयोग
इसलिए कहा जाता है कि मुद्रा का समुचित नियन्त्रण बहुत जरूरी है। इस सम्बन्ध में श्री नेजहॉट ने कहा है कि ‘‘मुद्रा का नियन्त्रण इसलिए आवश्यक है कि यह अपने आपको व्यवस्थित नहीं कर सकती।’’
अत: व्यापार चक्र मुद्रा की सामाजिक बुराई नहीं है।