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Q: Which one is the infective stage of plasmodium for man– मानव के लिये प्लाज्मोडियम की संक्रमण प्रावस्था कौन सी है–
  • A. Sporozoites/स्पोरोज्वाइट्स
  • B. Merozoites/मीरो ज्वाएट्स
  • C. Gametocytes/गैमीटोसाइट्स
  • D. Trophozoites/ ट्रोफोज्वाइट्स
Correct Answer: Option A - मानव के लिये प्लाज्मोडियम की संक्रमण प्रावस्था स्पोरोज्वाइट्स होती है। प्लाज्मोडियम की व्यस्क प्रावस्था को ट्रोफोज्वाएट (Trophozoite) कहते है। यह मनुष्य की लाल रूधिराणुओं (RBCs) में होती है परन्तु लाल रूधिराणुओं में पहुंचने से पहले, यकृत (liver) कोशिकाओं में परजीवी का व्यापक बहुगुणन (muttiplication) होता है। इस प्रकार मनुष्य में इसके जीवन चक्र के दो भाग होते है। (1) बाहृा रूधिराणु चक्र (2) रूधिराणुचक्र मनुष्य में प्लाजोडियम का प्रवेश इसकी एक सूक्ष्म संक्रमण प्रावस्था (Infective stage) से होता है। जिसे विषाणुजया स्पोराज्वॉएड कहते है। स्पोराज्वॉएट्स संक्रमित मादा एनोफेलीज की लार ग्रन्थियों में होते हैं। मनुष्य का रक्तपान के समय ही लार के साथ हजारों सूक्ष्म स्पोरोज्वॉएट्स हमारे रक्त में पहुँच जाते अर्थात वे विशिष्ट (inoculated) हो जाते है। लगभग आधे एक घण्टे में ही, सारे स्पोराज्वाएट्स मनुष्य के रूधिर से अन्तर्धान हो जाते है। रुधिर परिसंचरण के साथ यकृत में पहुंचने पर ये अपने स्रावण अंगको द्वारा स्रावित ऊतकनाशी (lytic) एन्जाइमों की सहायता से रुधिर कोशिकाओं से बाहर आ जाते है और यकृत कोशिकाओं में घुस जाते है। किसी यकृत कोशिकाओं में घुसने पर स्पोराज्वाइट्स इसके कोशिका द्रव्य का भक्षण करते हैं और वृद्धि द्वारा लगभग 45 m व्यास का बड़ा गोला व्यस्क बन जाता है। जिसे क्रिप्टोज्वाइट्स कहते है। क्रिप्टोज्वाइट्स एक विशेष प्रकार का वहु विभाजन (multiplefission) बिखण्डनीजनन या शाइजोगोनी द्वारा लगभग 1000 नन्हे अण्डाकार से क्रिप्टो मीरो ज्वॉएट्स में बंट जाता है।
A. मानव के लिये प्लाज्मोडियम की संक्रमण प्रावस्था स्पोरोज्वाइट्स होती है। प्लाज्मोडियम की व्यस्क प्रावस्था को ट्रोफोज्वाएट (Trophozoite) कहते है। यह मनुष्य की लाल रूधिराणुओं (RBCs) में होती है परन्तु लाल रूधिराणुओं में पहुंचने से पहले, यकृत (liver) कोशिकाओं में परजीवी का व्यापक बहुगुणन (muttiplication) होता है। इस प्रकार मनुष्य में इसके जीवन चक्र के दो भाग होते है। (1) बाहृा रूधिराणु चक्र (2) रूधिराणुचक्र मनुष्य में प्लाजोडियम का प्रवेश इसकी एक सूक्ष्म संक्रमण प्रावस्था (Infective stage) से होता है। जिसे विषाणुजया स्पोराज्वॉएड कहते है। स्पोराज्वॉएट्स संक्रमित मादा एनोफेलीज की लार ग्रन्थियों में होते हैं। मनुष्य का रक्तपान के समय ही लार के साथ हजारों सूक्ष्म स्पोरोज्वॉएट्स हमारे रक्त में पहुँच जाते अर्थात वे विशिष्ट (inoculated) हो जाते है। लगभग आधे एक घण्टे में ही, सारे स्पोराज्वाएट्स मनुष्य के रूधिर से अन्तर्धान हो जाते है। रुधिर परिसंचरण के साथ यकृत में पहुंचने पर ये अपने स्रावण अंगको द्वारा स्रावित ऊतकनाशी (lytic) एन्जाइमों की सहायता से रुधिर कोशिकाओं से बाहर आ जाते है और यकृत कोशिकाओं में घुस जाते है। किसी यकृत कोशिकाओं में घुसने पर स्पोराज्वाइट्स इसके कोशिका द्रव्य का भक्षण करते हैं और वृद्धि द्वारा लगभग 45 m व्यास का बड़ा गोला व्यस्क बन जाता है। जिसे क्रिप्टोज्वाइट्स कहते है। क्रिप्टोज्वाइट्स एक विशेष प्रकार का वहु विभाजन (multiplefission) बिखण्डनीजनन या शाइजोगोनी द्वारा लगभग 1000 नन्हे अण्डाकार से क्रिप्टो मीरो ज्वॉएट्स में बंट जाता है।

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मानव के लिये प्लाज्मोडियम की संक्रमण प्रावस्था स्पोरोज्वाइट्स होती है। प्लाज्मोडियम की व्यस्क प्रावस्था को ट्रोफोज्वाएट (Trophozoite) कहते है। यह मनुष्य की लाल रूधिराणुओं (RBCs) में होती है परन्तु लाल रूधिराणुओं में पहुंचने से पहले, यकृत (liver) कोशिकाओं में परजीवी का व्यापक बहुगुणन (muttiplication) होता है। इस प्रकार मनुष्य में इसके जीवन चक्र के दो भाग होते है। (1) बाहृा रूधिराणु चक्र (2) रूधिराणुचक्र मनुष्य में प्लाजोडियम का प्रवेश इसकी एक सूक्ष्म संक्रमण प्रावस्था (Infective stage) से होता है। जिसे विषाणुजया स्पोराज्वॉएड कहते है। स्पोराज्वॉएट्स संक्रमित मादा एनोफेलीज की लार ग्रन्थियों में होते हैं। मनुष्य का रक्तपान के समय ही लार के साथ हजारों सूक्ष्म स्पोरोज्वॉएट्स हमारे रक्त में पहुँच जाते अर्थात वे विशिष्ट (inoculated) हो जाते है। लगभग आधे एक घण्टे में ही, सारे स्पोराज्वाएट्स मनुष्य के रूधिर से अन्तर्धान हो जाते है। रुधिर परिसंचरण के साथ यकृत में पहुंचने पर ये अपने स्रावण अंगको द्वारा स्रावित ऊतकनाशी (lytic) एन्जाइमों की सहायता से रुधिर कोशिकाओं से बाहर आ जाते है और यकृत कोशिकाओं में घुस जाते है। किसी यकृत कोशिकाओं में घुसने पर स्पोराज्वाइट्स इसके कोशिका द्रव्य का भक्षण करते हैं और वृद्धि द्वारा लगभग 45 m व्यास का बड़ा गोला व्यस्क बन जाता है। जिसे क्रिप्टोज्वाइट्स कहते है। क्रिप्टोज्वाइट्स एक विशेष प्रकार का वहु विभाजन (multiplefission) बिखण्डनीजनन या शाइजोगोनी द्वारा लगभग 1000 नन्हे अण्डाकार से क्रिप्टो मीरो ज्वॉएट्स में बंट जाता है।