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Q: Which of the following water management strategy is cost-effective in India ? निम्नलिखित में से कौन सी जल प्रबन्धन युक्ति भारत में लागत का अधिकतम देने वाली है?
  • A. Improvement of the flush system/ स्वक्षालन शौचालय व्यवस्था में सुधार
  • B. Treatment and use of waste water/ अपशिष्ट जल का उपचार एवं प्रयोग
  • C. Rain water harvesting/वर्षा के जल के संचयन
  • D. Recycling and re-use of water/ जल का पुनर्चक्रण एवं पुन: उपयोग
Correct Answer: Option C - भारत में वर्षा के मौसम में पर्याप्त मात्रा में वर्षा होने के कारण उसका संचय न करने से जल की उपलब्धता एक गंभीर समस्या बन चुकी है। वर्षा जल के संग्रहण से वर्तमान जल संकट को दूर किया जा सकता है। वर्षा जल का संचय वैज्ञानिक तरीकों में सबसे कारगर है- रेन वाटर हार्वेस्टिंग अर्थात् जिसका जल संचित किया जायेगा उसका प्रयोग हम भविष्य में कर सकेगें। वर्षा जल संग्रहण के लिये तेज बहाव वाले क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त होते हैं। इस जल का प्रयोग लगभग सभी कार्यो में किया जा सकता है तथा गुणवत्तापूर्ण होने पर इसका प्रयोग पेयजल आदि हेतु भी किया जा सकता है।
C. भारत में वर्षा के मौसम में पर्याप्त मात्रा में वर्षा होने के कारण उसका संचय न करने से जल की उपलब्धता एक गंभीर समस्या बन चुकी है। वर्षा जल के संग्रहण से वर्तमान जल संकट को दूर किया जा सकता है। वर्षा जल का संचय वैज्ञानिक तरीकों में सबसे कारगर है- रेन वाटर हार्वेस्टिंग अर्थात् जिसका जल संचित किया जायेगा उसका प्रयोग हम भविष्य में कर सकेगें। वर्षा जल संग्रहण के लिये तेज बहाव वाले क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त होते हैं। इस जल का प्रयोग लगभग सभी कार्यो में किया जा सकता है तथा गुणवत्तापूर्ण होने पर इसका प्रयोग पेयजल आदि हेतु भी किया जा सकता है।

Explanations:

भारत में वर्षा के मौसम में पर्याप्त मात्रा में वर्षा होने के कारण उसका संचय न करने से जल की उपलब्धता एक गंभीर समस्या बन चुकी है। वर्षा जल के संग्रहण से वर्तमान जल संकट को दूर किया जा सकता है। वर्षा जल का संचय वैज्ञानिक तरीकों में सबसे कारगर है- रेन वाटर हार्वेस्टिंग अर्थात् जिसका जल संचित किया जायेगा उसका प्रयोग हम भविष्य में कर सकेगें। वर्षा जल संग्रहण के लिये तेज बहाव वाले क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त होते हैं। इस जल का प्रयोग लगभग सभी कार्यो में किया जा सकता है तथा गुणवत्तापूर्ण होने पर इसका प्रयोग पेयजल आदि हेतु भी किया जा सकता है।