Correct Answer:
Option B - गोशाल मक्खलिपुत्त ‘आजीवक संप्रदाय’ के संस्थापक थे। वह नालन्दा में जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी के शिष्य बन गये, किन्तु 6 वर्षों पश्चात् उनका साथ छोड़कर ‘आजीवक सम्प्रदाय’ की स्थापना की। इनके मत को भाग्यवादी (नियतिवाद) कहा जाता है। महावीर स्वामी महात्मा बुद्ध के समकालीन थे। अत: ये गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित नहीं थे। गौतम बुद्ध का मूल नाम सिद्धार्थ था। इनका जन्म लुम्बिनी में वैशाख पूर्णिमा के दिन 563 ई. पू. में हुआ था।
बुद्ध के जीवन से संबंधित थे-
(1) कंथक - सिद्धार्थ ने कपिलवस्तु छोड़ने के बाद अनोमा नदी को अपने घोड़े कंथक पर बैठकर पार किया था।
(2) चन्ना - बुद्ध के सारथी का नाम - चन्ना (छंदक) था।
(3) अलार-कलाम- गौतम बुद्ध के प्रथम गुरू अलार-कलाम (सांख्य दर्शक) थे।
गौतम बुद्ध ने 29 वर्ष की आयु में घोड़े ‘कंथक’ तथा सारथी ‘छंदक’ के साथ गृहत्याग किया जिसे बौद्ध साहित्य में ‘महाभिनिष्क्रमण’ कहा गया।
B. गोशाल मक्खलिपुत्त ‘आजीवक संप्रदाय’ के संस्थापक थे। वह नालन्दा में जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी के शिष्य बन गये, किन्तु 6 वर्षों पश्चात् उनका साथ छोड़कर ‘आजीवक सम्प्रदाय’ की स्थापना की। इनके मत को भाग्यवादी (नियतिवाद) कहा जाता है। महावीर स्वामी महात्मा बुद्ध के समकालीन थे। अत: ये गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित नहीं थे। गौतम बुद्ध का मूल नाम सिद्धार्थ था। इनका जन्म लुम्बिनी में वैशाख पूर्णिमा के दिन 563 ई. पू. में हुआ था।
बुद्ध के जीवन से संबंधित थे-
(1) कंथक - सिद्धार्थ ने कपिलवस्तु छोड़ने के बाद अनोमा नदी को अपने घोड़े कंथक पर बैठकर पार किया था।
(2) चन्ना - बुद्ध के सारथी का नाम - चन्ना (छंदक) था।
(3) अलार-कलाम- गौतम बुद्ध के प्रथम गुरू अलार-कलाम (सांख्य दर्शक) थे।
गौतम बुद्ध ने 29 वर्ष की आयु में घोड़े ‘कंथक’ तथा सारथी ‘छंदक’ के साथ गृहत्याग किया जिसे बौद्ध साहित्य में ‘महाभिनिष्क्रमण’ कहा गया।