Correct Answer:
Option B - थियोडोलाइट की दोनों फलकों से उसी लक्ष्य का प्रेक्षण करने पर उपकरण की दोषपूर्ण समायोजन के कारण उत्पन्न निम्न त्रुटियाँ स्वयं ही दूर हो जाती है-
(i) संधान रेखा व ट्रूनियन अक्ष के समायोजन न होने के कारण
(ii) दूरबीन की क्षैतिज रेखा का संधान रेखा (Line of collimation)के सम्पाती न होने के कारण
(iii) दूरबीन की क्षैतिज अक्ष का उपकरण की ऊध्र्वाधर अक्ष के लम्ब न होने के कारण
पुनरुक्ति विधि (Reiteration method)– इसे क्षितिज को बन्द करना (closing of Horizom) भी कहते हैं। इस विधि में अनुक्रमण में सभी कोणों का मापन करते हुये उसी रेखा पर लौट आते हैं, जहाँ से कार्य प्रारम्भ किया गया था। इस प्रकार प्रेक्षक थियोडोलाइट का पूर्ण एक क्षैतिज चक्र 360º घूम जाता है।
B. थियोडोलाइट की दोनों फलकों से उसी लक्ष्य का प्रेक्षण करने पर उपकरण की दोषपूर्ण समायोजन के कारण उत्पन्न निम्न त्रुटियाँ स्वयं ही दूर हो जाती है-
(i) संधान रेखा व ट्रूनियन अक्ष के समायोजन न होने के कारण
(ii) दूरबीन की क्षैतिज रेखा का संधान रेखा (Line of collimation)के सम्पाती न होने के कारण
(iii) दूरबीन की क्षैतिज अक्ष का उपकरण की ऊध्र्वाधर अक्ष के लम्ब न होने के कारण
पुनरुक्ति विधि (Reiteration method)– इसे क्षितिज को बन्द करना (closing of Horizom) भी कहते हैं। इस विधि में अनुक्रमण में सभी कोणों का मापन करते हुये उसी रेखा पर लौट आते हैं, जहाँ से कार्य प्रारम्भ किया गया था। इस प्रकार प्रेक्षक थियोडोलाइट का पूर्ण एक क्षैतिज चक्र 360º घूम जाता है।