Correct Answer:
Option D - उपर्युुक्त कथन (I) व (II) दोनों ही गलत है क्योंकि जब आदर्श अवलोकन किए जा रहे समूह के सदस्यों को यह पता रहता है कि कोई व्यक्ति उनके व्यवहार का अवलोकन कर रहा है, तब उनका व्यवहार स्वभाविक नहीं रह पाता उनके व्यवहार में दिखावा और नाटकीयता आ जाती है। ऐसी स्थिति में तथ्यों के संकलन की दृष्टि से अवलोकन में नया व्यवहार प्राप्त करना आदर्शीय नहीं होता है। प्रकटीकरण प्रभाव का उदाहरण सामूहिक व्यवहार नहीं होता है। किसी समूह का सदस्य होना व्यक्ति की आत्मधारणा या आत्म सम्प्रत्यय को बढ़ावा देता है। जब वैयक्तिक रूप से हम सभी वांछित जानकारिकयों या सूचनाओं को प्राप्त नहीं कर पाते तो समूह इस प्रकार की जानकारी और ज्ञान की कमी को पूरा करता है। सामूहिक व्यवहार में व्यक्तिगत रूप से अर्थात् प्रकटीकरण प्रभाव के रूप में कार्य नहीं किया जा सकता।
D. उपर्युुक्त कथन (I) व (II) दोनों ही गलत है क्योंकि जब आदर्श अवलोकन किए जा रहे समूह के सदस्यों को यह पता रहता है कि कोई व्यक्ति उनके व्यवहार का अवलोकन कर रहा है, तब उनका व्यवहार स्वभाविक नहीं रह पाता उनके व्यवहार में दिखावा और नाटकीयता आ जाती है। ऐसी स्थिति में तथ्यों के संकलन की दृष्टि से अवलोकन में नया व्यवहार प्राप्त करना आदर्शीय नहीं होता है। प्रकटीकरण प्रभाव का उदाहरण सामूहिक व्यवहार नहीं होता है। किसी समूह का सदस्य होना व्यक्ति की आत्मधारणा या आत्म सम्प्रत्यय को बढ़ावा देता है। जब वैयक्तिक रूप से हम सभी वांछित जानकारिकयों या सूचनाओं को प्राप्त नहीं कर पाते तो समूह इस प्रकार की जानकारी और ज्ञान की कमी को पूरा करता है। सामूहिक व्यवहार में व्यक्तिगत रूप से अर्थात् प्रकटीकरण प्रभाव के रूप में कार्य नहीं किया जा सकता।