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Q: Which of the following statements about Ryotwari settlement is/are correct? रैयतवाड़ी बन्दोबस्त के विषय में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? 1. It recognized the cultivators as the owner of land./इसने काश्तकारों को भूस्वामियों के रूप में मान्यता दी। 2. It was a temporary settlement. यह अस्थायी बन्दोबस्त था। 3. It was introduced later than the permanent settlement. यह स्थायी बन्दोबस्त की अपेक्षा बाद में प्रारंभ किया गया। Select the correct answer using the code given below /नीचे दिए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
  • A. 1 and 2 only/केवल 1 और 2
  • B. 1, 2 and 3/1, 2 और 3
  • C. 1 only/केवल 1
  • D. 2 and 3 only/केवल 2 और 3
Correct Answer: Option B - स्थाई बंदोबस्त के पश्चात दक्षिणी एवं पश्चिम भारत (बम्बई) में अपनाई गई। रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त में किसानों द्वारा लगान (मालगुजारी) सीधे सरकार को दिया जाता था। इस व्यवस्था में सरकार रैय्यत को पट्टे देती थी तथा कर लगाने के पूर्व भूमि का सर्वेक्षण और मूल्य निर्धारण किया जाता था। बम्बई तथा मद्रास के अधिकांश भाग में रैय्यतवाड़ी व्यवस्था लागू की गई थी। इस व्यवस्था का सूत्रपात टॉमस मुनरो ने किया था, जिसे मई 1820 में मद्रास का गवर्नर बनाया गया था। अधिकांश जमीन (भूमि) महाजनों, सौदागरों, व्यापारियों, साहूकारों तथा धनी किसानों के हाथ में चली गयी जो रैय्यतों के द्वारा खेती करवाते थे। भारतीय धनी वर्गों द्वारा जमीन खरीदने और जमींदार बनने का एक कारण यह भी था कि उद्योग में पूँजी के निवेश की कोई खास गुंजाइश नहीं थी। रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त व्यवस्था में काश्तकारों को भू-स्वामी (मालिक) माना गया। यह अस्थायी बन्दोबस्त था क्योंकि प्रत्येक 30 वर्ष बाद लगान अदायगी की पुर्नसमीक्षा की जाती थी।
B. स्थाई बंदोबस्त के पश्चात दक्षिणी एवं पश्चिम भारत (बम्बई) में अपनाई गई। रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त में किसानों द्वारा लगान (मालगुजारी) सीधे सरकार को दिया जाता था। इस व्यवस्था में सरकार रैय्यत को पट्टे देती थी तथा कर लगाने के पूर्व भूमि का सर्वेक्षण और मूल्य निर्धारण किया जाता था। बम्बई तथा मद्रास के अधिकांश भाग में रैय्यतवाड़ी व्यवस्था लागू की गई थी। इस व्यवस्था का सूत्रपात टॉमस मुनरो ने किया था, जिसे मई 1820 में मद्रास का गवर्नर बनाया गया था। अधिकांश जमीन (भूमि) महाजनों, सौदागरों, व्यापारियों, साहूकारों तथा धनी किसानों के हाथ में चली गयी जो रैय्यतों के द्वारा खेती करवाते थे। भारतीय धनी वर्गों द्वारा जमीन खरीदने और जमींदार बनने का एक कारण यह भी था कि उद्योग में पूँजी के निवेश की कोई खास गुंजाइश नहीं थी। रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त व्यवस्था में काश्तकारों को भू-स्वामी (मालिक) माना गया। यह अस्थायी बन्दोबस्त था क्योंकि प्रत्येक 30 वर्ष बाद लगान अदायगी की पुर्नसमीक्षा की जाती थी।

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स्थाई बंदोबस्त के पश्चात दक्षिणी एवं पश्चिम भारत (बम्बई) में अपनाई गई। रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त में किसानों द्वारा लगान (मालगुजारी) सीधे सरकार को दिया जाता था। इस व्यवस्था में सरकार रैय्यत को पट्टे देती थी तथा कर लगाने के पूर्व भूमि का सर्वेक्षण और मूल्य निर्धारण किया जाता था। बम्बई तथा मद्रास के अधिकांश भाग में रैय्यतवाड़ी व्यवस्था लागू की गई थी। इस व्यवस्था का सूत्रपात टॉमस मुनरो ने किया था, जिसे मई 1820 में मद्रास का गवर्नर बनाया गया था। अधिकांश जमीन (भूमि) महाजनों, सौदागरों, व्यापारियों, साहूकारों तथा धनी किसानों के हाथ में चली गयी जो रैय्यतों के द्वारा खेती करवाते थे। भारतीय धनी वर्गों द्वारा जमीन खरीदने और जमींदार बनने का एक कारण यह भी था कि उद्योग में पूँजी के निवेश की कोई खास गुंजाइश नहीं थी। रैय्यतवाड़ी बन्दोबस्त व्यवस्था में काश्तकारों को भू-स्वामी (मालिक) माना गया। यह अस्थायी बन्दोबस्त था क्योंकि प्रत्येक 30 वर्ष बाद लगान अदायगी की पुर्नसमीक्षा की जाती थी।