Correct Answer:
Option C - प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में बम्बई में आत्माराम पाण्डुरंग ने किया था। प्रार्थना समाज ने हिन्दू धर्म में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठायी तथा हिन्दू समाज में सुधार करने का प्रयास किया। प्रार्थना समाज का एकेश्वरवाद में गहरा विश्वास था। इन्होंने बाल विवाह, पर्दा प्रथा, बहु विवाह एवं जाति-प्रथा आदि का विरोध किया तथा स्त्री शिक्षा एवं विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहित किया। लड़की एवं लड़के की आयु सीमा में वृद्धि हेतु मांग की। प्रार्थना समाज ने अस्पृश्यता की समाप्ति की मांग नहीं की थी। प्रार्थना समाज को लोकप्रिय बनाने का कार्य रानाडे ने किया।
नोट- दादोबा पाडुरंग तर्खडकर बंबई के एक समाज सुधारक थे। हालांकि इन्हें मराठी लोगों में दादोबा पाडुरंग के नाम से जाने जाते थे। ये प्रार्थना समाज से जुड़े थे।
C. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में बम्बई में आत्माराम पाण्डुरंग ने किया था। प्रार्थना समाज ने हिन्दू धर्म में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठायी तथा हिन्दू समाज में सुधार करने का प्रयास किया। प्रार्थना समाज का एकेश्वरवाद में गहरा विश्वास था। इन्होंने बाल विवाह, पर्दा प्रथा, बहु विवाह एवं जाति-प्रथा आदि का विरोध किया तथा स्त्री शिक्षा एवं विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहित किया। लड़की एवं लड़के की आयु सीमा में वृद्धि हेतु मांग की। प्रार्थना समाज ने अस्पृश्यता की समाप्ति की मांग नहीं की थी। प्रार्थना समाज को लोकप्रिय बनाने का कार्य रानाडे ने किया।
नोट- दादोबा पाडुरंग तर्खडकर बंबई के एक समाज सुधारक थे। हालांकि इन्हें मराठी लोगों में दादोबा पाडुरंग के नाम से जाने जाते थे। ये प्रार्थना समाज से जुड़े थे।