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Q: Which of the following statements about Bhadrabahu is/are correct?/निम्नलिखित में कौन-सा/से कथन ‘भद्रबाहु’ के बारे में सही है/हैं? 1. He was a Jain Saint./वे जैन संत थे। 2. He was spiritual teacher of Chandragupta Maurya./वे चंद्रगुप्त मौर्य के आध्यात्मिक गुरु थे। Select the correct answer using the code given below: नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
  • A. 1 only/केवल 1
  • B. 2 only/केवल 2
  • C. Both 1 and 2/1 और 2 दोनों
  • D. Neither 1 nor 2//न तो1 और न ही 2
Correct Answer: Option C - चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के अन्तिम चरण में मगध में 12 वर्ष का भीषण अकाल पड़ा। जैन साधु भद्रबाहु के नेतृत्व में उनके बहुत से अनुयायी दक्षिण भारत चले गये, जबकि स्थूलबाहु के नेतृत्व में अधिकांश लोग यहीं पर रह गये। कर्नाटक के श्रवण-बेलगोला में चन्द्रगुप्त मौर्य एवं उनके आचार्य भद्रबाहु ने तपस्या की। वापस आने पर भद्रबाहु और स्थूलबाहु के अनुयायियों में मतभेद हो गया। भद्रबाहु के अनुयायी निर्वस्त्र रहने के पक्षपाती थे अत: दिगम्बर कहलाए, जबकि स्थूलबाहु के अनुयायियों ने केवल शृंगारिक वस्त्रों का परित्याग कर श्वेतवस्त्र धारण करके साधना करना उचित समझा अत: वे श्वेताम्बर कहलाए। श्वेताम्बर महावीर स्वामी की पूजा भगवान के रूप में करते थे। पहली शताब्दी ईस्वी में कलिंग के राजा खारवेल ने जैन धर्म को संरक्षण प्रदान किया।
C. चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के अन्तिम चरण में मगध में 12 वर्ष का भीषण अकाल पड़ा। जैन साधु भद्रबाहु के नेतृत्व में उनके बहुत से अनुयायी दक्षिण भारत चले गये, जबकि स्थूलबाहु के नेतृत्व में अधिकांश लोग यहीं पर रह गये। कर्नाटक के श्रवण-बेलगोला में चन्द्रगुप्त मौर्य एवं उनके आचार्य भद्रबाहु ने तपस्या की। वापस आने पर भद्रबाहु और स्थूलबाहु के अनुयायियों में मतभेद हो गया। भद्रबाहु के अनुयायी निर्वस्त्र रहने के पक्षपाती थे अत: दिगम्बर कहलाए, जबकि स्थूलबाहु के अनुयायियों ने केवल शृंगारिक वस्त्रों का परित्याग कर श्वेतवस्त्र धारण करके साधना करना उचित समझा अत: वे श्वेताम्बर कहलाए। श्वेताम्बर महावीर स्वामी की पूजा भगवान के रूप में करते थे। पहली शताब्दी ईस्वी में कलिंग के राजा खारवेल ने जैन धर्म को संरक्षण प्रदान किया।

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चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के अन्तिम चरण में मगध में 12 वर्ष का भीषण अकाल पड़ा। जैन साधु भद्रबाहु के नेतृत्व में उनके बहुत से अनुयायी दक्षिण भारत चले गये, जबकि स्थूलबाहु के नेतृत्व में अधिकांश लोग यहीं पर रह गये। कर्नाटक के श्रवण-बेलगोला में चन्द्रगुप्त मौर्य एवं उनके आचार्य भद्रबाहु ने तपस्या की। वापस आने पर भद्रबाहु और स्थूलबाहु के अनुयायियों में मतभेद हो गया। भद्रबाहु के अनुयायी निर्वस्त्र रहने के पक्षपाती थे अत: दिगम्बर कहलाए, जबकि स्थूलबाहु के अनुयायियों ने केवल शृंगारिक वस्त्रों का परित्याग कर श्वेतवस्त्र धारण करके साधना करना उचित समझा अत: वे श्वेताम्बर कहलाए। श्वेताम्बर महावीर स्वामी की पूजा भगवान के रूप में करते थे। पहली शताब्दी ईस्वी में कलिंग के राजा खारवेल ने जैन धर्म को संरक्षण प्रदान किया।