Correct Answer:
Option D - रस का शाब्दिक अर्थ है ‘आनंद’। काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे रस कहा जाता है। काव्य में रस का वही स्थान है जो शरीर में आत्मा का है। जिस प्रकार आत्मा के अभाव में प्राणी का अस्तित्व सम्भव नहीं है, उसी प्रकार रसहीन कथन को काव्य नहीं कहा जा सकता है। उपयुक्त प्रश्न मे दिए गए रस के युग्मों में से केवल विकल्प (d) अर्थात् संथम-अक्षोभ सही है।
D. रस का शाब्दिक अर्थ है ‘आनंद’। काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे रस कहा जाता है। काव्य में रस का वही स्थान है जो शरीर में आत्मा का है। जिस प्रकार आत्मा के अभाव में प्राणी का अस्तित्व सम्भव नहीं है, उसी प्रकार रसहीन कथन को काव्य नहीं कहा जा सकता है। उपयुक्त प्रश्न मे दिए गए रस के युग्मों में से केवल विकल्प (d) अर्थात् संथम-अक्षोभ सही है।