Correct Answer:
Option D - सांख्य मत में जो प्रमाण स्वीकार नहीं किया गया वह ‘अर्थापत्ति’ है। सांख्ययोग- तीन प्रमाण मानता है- प्रत्यक्ष, (द्रष्ट), अनुमान, शब्द (व्याप्त)
जबकि प्रभाकर मीमांसक भाट्ट मीमांसक, पौराणिक ये अर्थापत्ति को प्रमाण भी मानते हैं।
प्रभाकर मीमांसक प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति)
भाट्ट मीमांसक- छह प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति, अभाव)
पौराणिक - आठ प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति, अभाव, सम्भव, ऐतिह्य)
D. सांख्य मत में जो प्रमाण स्वीकार नहीं किया गया वह ‘अर्थापत्ति’ है। सांख्ययोग- तीन प्रमाण मानता है- प्रत्यक्ष, (द्रष्ट), अनुमान, शब्द (व्याप्त)
जबकि प्रभाकर मीमांसक भाट्ट मीमांसक, पौराणिक ये अर्थापत्ति को प्रमाण भी मानते हैं।
प्रभाकर मीमांसक प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति)
भाट्ट मीमांसक- छह प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति, अभाव)
पौराणिक - आठ प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति, अभाव, सम्भव, ऐतिह्य)