Correct Answer:
Option D - द्वितीय विश्व युद्ध के बाद में ऐसी अनेक घटनाएँ घटी, जिन्हें अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध का सूचक माना जाता है।
पुâल्टन भाषण – शीत युद्ध का आरम्भ 5 मार्च, 1946 को इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि ‘‘हमें तानाशाही के एक स्वरूप के स्थान पर उसके दूसरे स्वरूप की स्थापना रोकनी चाहिए। स्वतंत्रता की दीपशिखा प्रज्जवलित रखने एवं ईसाई मान्यता की सुरक्षा के लिए आंग्ला-अमरीकी गठबंधन स्थापित किया जाना चाहिए।
ट्रूमैन सिद्धान्त – साम्यवाद विरोध के नाम पर अमेरिका ने 12 मार्च 1947 को विश्व के अन्य देशों के लिए ट्रूमैन सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इस सिद्धान्त के अनुसार – संसार में कहीं भी शान्ति को भंग करने वाला परोक्ष या अपरोक्ष आक्रमण कार्य होगा, तो अमेरिका उसे सुरक्षा संकट समझेगा तथा वह उसे रोकने का पूरा प्रयास करेगा।
मार्शल योजना – इसके अंतर्गत संयुक्त राज्य अमेरिका ने चार वर्ष की अवधि (1948-1952) के लिए पश्चिमी यूरोप के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए सहायता दी।
D. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद में ऐसी अनेक घटनाएँ घटी, जिन्हें अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध का सूचक माना जाता है।
पुâल्टन भाषण – शीत युद्ध का आरम्भ 5 मार्च, 1946 को इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि ‘‘हमें तानाशाही के एक स्वरूप के स्थान पर उसके दूसरे स्वरूप की स्थापना रोकनी चाहिए। स्वतंत्रता की दीपशिखा प्रज्जवलित रखने एवं ईसाई मान्यता की सुरक्षा के लिए आंग्ला-अमरीकी गठबंधन स्थापित किया जाना चाहिए।
ट्रूमैन सिद्धान्त – साम्यवाद विरोध के नाम पर अमेरिका ने 12 मार्च 1947 को विश्व के अन्य देशों के लिए ट्रूमैन सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इस सिद्धान्त के अनुसार – संसार में कहीं भी शान्ति को भंग करने वाला परोक्ष या अपरोक्ष आक्रमण कार्य होगा, तो अमेरिका उसे सुरक्षा संकट समझेगा तथा वह उसे रोकने का पूरा प्रयास करेगा।
मार्शल योजना – इसके अंतर्गत संयुक्त राज्य अमेरिका ने चार वर्ष की अवधि (1948-1952) के लिए पश्चिमी यूरोप के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए सहायता दी।