Correct Answer:
Option D - प्राथमिक घाटे की मात्रा निर्धारित करने का उद्देश्य वर्तमान राजकोषीय असंतुलन पर ध्यान केंद्रित करना है।
∎ सरकारी उधार पर राजकोषीय व्यय के प्रभावों का अनुमान लगाना।
∎ राजस्व से अधिक वर्तमान व्यय के कारण उधार लेने का अनुमान प्राप्त करना।
∎ राजस्व से अधिक मौजूदा खर्चों के कारण अनुमानित उधार प्राप्त करना।
∎ प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा – निवल ब्याज देयतायें।
D. प्राथमिक घाटे की मात्रा निर्धारित करने का उद्देश्य वर्तमान राजकोषीय असंतुलन पर ध्यान केंद्रित करना है।
∎ सरकारी उधार पर राजकोषीय व्यय के प्रभावों का अनुमान लगाना।
∎ राजस्व से अधिक वर्तमान व्यय के कारण उधार लेने का अनुमान प्राप्त करना।
∎ राजस्व से अधिक मौजूदा खर्चों के कारण अनुमानित उधार प्राप्त करना।
∎ प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा – निवल ब्याज देयतायें।