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Q: Which of the following is NOT a result of the EI Nino effect? निम्नलिखित में से कौन सा अल नीनो प्रभाव (El Nino effect) का परिणाम नहीं है?
  • A. Distortion of equatorial atmospheric circulation भूमध्यरेखीय वायुमंडलीय परिसंचरण की विकृति
  • B. Irregularities in the evaporation of sea water /समुद्री जल के वाष्पीकरण में अनियमितताएँ (
  • C. Soil erosion/मृदा अपरदन
  • D. Reduction in the amount of plankton which further reduces the number of fish in the sea/प्लवक की मात्रा में कमी जिससे समुद्र में मछलियों की संख्या और कम हो जाती है
Correct Answer: Option C - यह एक जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप में तापन की स्थिति को दर्शाता है। अल-नीनों घटना एक नियमित चक्र नहीं हैं। ये दो से सात वर्ष के अंतराल पर अनियमित रूप से होते है। अल-नीनों के प्रभाव– • अल-नीनों समुद्र के तापमान, समुद्र की धाराओं की गति एवं शक्ति, तटीय मत्स्य पालन और ऑस्ट्रेलिया से दक्षिण अमेरिका तथा उनमें से आगे तक की स्थानीय मौसम को भी प्रभावित करता है। • गर्म जल के सतह पर बहाव के कारण वर्षा में वृद्धि होती है। • बाढ़ एवं सूखे जैसे प्राकृतिक खतरों से प्रभावित समुदायों में बीमारियाँ पनपती हैं। • इसके कारण दक्षिण अमेरिका में बारिश अधिक होती है, वहीं इंडोनेशिया एवं ऑस्ट्रेलिया में इसके कारण सूखे की घटनाएँ होती है। • प्लवक की मात्रा में कमी होती है जिससे समुद्री मछलियों की संख्या कम हो जाती है।
C. यह एक जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप में तापन की स्थिति को दर्शाता है। अल-नीनों घटना एक नियमित चक्र नहीं हैं। ये दो से सात वर्ष के अंतराल पर अनियमित रूप से होते है। अल-नीनों के प्रभाव– • अल-नीनों समुद्र के तापमान, समुद्र की धाराओं की गति एवं शक्ति, तटीय मत्स्य पालन और ऑस्ट्रेलिया से दक्षिण अमेरिका तथा उनमें से आगे तक की स्थानीय मौसम को भी प्रभावित करता है। • गर्म जल के सतह पर बहाव के कारण वर्षा में वृद्धि होती है। • बाढ़ एवं सूखे जैसे प्राकृतिक खतरों से प्रभावित समुदायों में बीमारियाँ पनपती हैं। • इसके कारण दक्षिण अमेरिका में बारिश अधिक होती है, वहीं इंडोनेशिया एवं ऑस्ट्रेलिया में इसके कारण सूखे की घटनाएँ होती है। • प्लवक की मात्रा में कमी होती है जिससे समुद्री मछलियों की संख्या कम हो जाती है।

Explanations:

यह एक जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप में तापन की स्थिति को दर्शाता है। अल-नीनों घटना एक नियमित चक्र नहीं हैं। ये दो से सात वर्ष के अंतराल पर अनियमित रूप से होते है। अल-नीनों के प्रभाव– • अल-नीनों समुद्र के तापमान, समुद्र की धाराओं की गति एवं शक्ति, तटीय मत्स्य पालन और ऑस्ट्रेलिया से दक्षिण अमेरिका तथा उनमें से आगे तक की स्थानीय मौसम को भी प्रभावित करता है। • गर्म जल के सतह पर बहाव के कारण वर्षा में वृद्धि होती है। • बाढ़ एवं सूखे जैसे प्राकृतिक खतरों से प्रभावित समुदायों में बीमारियाँ पनपती हैं। • इसके कारण दक्षिण अमेरिका में बारिश अधिक होती है, वहीं इंडोनेशिया एवं ऑस्ट्रेलिया में इसके कारण सूखे की घटनाएँ होती है। • प्लवक की मात्रा में कमी होती है जिससे समुद्री मछलियों की संख्या कम हो जाती है।