Correct Answer:
Option B - कार्यपालिका को नियम-विनियम बनाने के लिए प्रत्यायोजित शक्ति से संबंधित समिति, अधीनस्थ विधायन समिति (अधीनस्थ विधान पर समिति) है।
किसी अधीनस्थ प्राधिकारी को प्रत्यायोजित वैधानिक कृत्यों के अनुसरण में बनाये गए प्रत्येक नियम, उपनियम, विनियम, उपविधि, निर्देश अथवा आदेश, जिसको संसद के समक्ष रखा जाना अपेक्षित हो, ताकि यह जाँच हो सके कि संसद द्वारा कार्यपालिका को प्रतिनिधित्व अथवा संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग भली-भाँति हो रहा है या नहीं, यह समिति इस पर विचार करती है और प्रतिवेदन देती है।
इसकी जाँच करने तथा इस पर प्रतिवेदन देने के लिए दोनों सदनों में (लोकसभा तथा राज्यसभा) अलग-अलग 15 सदस्यीय अधीनस्थ विधायन समिति का गठन स्पीकर/सभापति द्वारा किया जाता है। सर्वप्रथम इस समिति का गठन 1953 में किया गया था।
B. कार्यपालिका को नियम-विनियम बनाने के लिए प्रत्यायोजित शक्ति से संबंधित समिति, अधीनस्थ विधायन समिति (अधीनस्थ विधान पर समिति) है।
किसी अधीनस्थ प्राधिकारी को प्रत्यायोजित वैधानिक कृत्यों के अनुसरण में बनाये गए प्रत्येक नियम, उपनियम, विनियम, उपविधि, निर्देश अथवा आदेश, जिसको संसद के समक्ष रखा जाना अपेक्षित हो, ताकि यह जाँच हो सके कि संसद द्वारा कार्यपालिका को प्रतिनिधित्व अथवा संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग भली-भाँति हो रहा है या नहीं, यह समिति इस पर विचार करती है और प्रतिवेदन देती है।
इसकी जाँच करने तथा इस पर प्रतिवेदन देने के लिए दोनों सदनों में (लोकसभा तथा राज्यसभा) अलग-अलग 15 सदस्यीय अधीनस्थ विधायन समिति का गठन स्पीकर/सभापति द्वारा किया जाता है। सर्वप्रथम इस समिति का गठन 1953 में किया गया था।