Correct Answer:
Option D - प्रत्येक वर्ष छिन्दवाड़ा की जाम नदी के तट पर पांदुर्ना व सांबरगांव के बीच गोटमार मेला का आयोजन किया जाता है। इस दौरान दोनों ओर से पत्थरों की बारिश की जाती है। इसकी शुरुआत 17वीं शताब्दी से मानी जाती है। कृष्ण पक्ष भादों मास के पहले दिन बैलों का त्योहार पोला तथा दूसरे दिन गोटमार मेला का आयोजन किया जाता है। कुम्भ का आयोजन प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन में किया जाता हैं।
D. प्रत्येक वर्ष छिन्दवाड़ा की जाम नदी के तट पर पांदुर्ना व सांबरगांव के बीच गोटमार मेला का आयोजन किया जाता है। इस दौरान दोनों ओर से पत्थरों की बारिश की जाती है। इसकी शुरुआत 17वीं शताब्दी से मानी जाती है। कृष्ण पक्ष भादों मास के पहले दिन बैलों का त्योहार पोला तथा दूसरे दिन गोटमार मेला का आयोजन किया जाता है। कुम्भ का आयोजन प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन में किया जाता हैं।