search
Q: Which of the following are correct example of the statement "mathematics is hierarchical in levels that are logically structured". कथन " गणित उन स्तरों में पदानुक्रमित है जो कि तार्किक रूप से व्यवस्थित है " के लिए निम्नलिखित में से कौन-से सही उदाहरण है? (1) The concept of integers needs to be developed before the concept of multiplication and division of numbers./पूर्णांकों की अवधारणा को संख्याओं के गुणन और भाग की अवधारणा से पूर्व विकसित करने की आवश्यकता होती है। (2) Multiplication follows and builds on the concept of addition. /गुणन, योग की अवधारणा की अनुपालन करता है और उस पर विकसित होता है। (3) Number sense needs to be developed before the concepts of addition and subtraction/संख्या बोध को योग और व्यवकलन की अवधारणा से पूर्व विकसित करने की आवश्यकता होती है। Choose the correct option:/सही विकल्प चुनें
  • A. only (2)/केवल (2)
  • B. (1) and (2)/(1) और (2)
  • C. (2) and (3)/ (2) और (3)
  • D. (1) and (3)/(1) और (3)
Correct Answer: Option C - गणितीय अवधारणाएँ पदानुक्रमित होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक कक्षा से दूसरी कक्षा में व्यावहारिक और वैचारिक ज्ञान पर निर्मित होती है, अर्थात् उन्हें पहले अंकगणित, फिर बीजगणित, त्रिकोणमिति और कलन जैसे पूर्व निर्धारित क्रम में पढ़ाया जाता हैं। गुणन, योग की अवधारणा की अनुपालन करता है और उस पर विकसित होता है। ● संख्या बोध को योग और व्यवकलन की, अवधारणा से पूर्व विकसित करने की आवश्यकता होती हैं।
C. गणितीय अवधारणाएँ पदानुक्रमित होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक कक्षा से दूसरी कक्षा में व्यावहारिक और वैचारिक ज्ञान पर निर्मित होती है, अर्थात् उन्हें पहले अंकगणित, फिर बीजगणित, त्रिकोणमिति और कलन जैसे पूर्व निर्धारित क्रम में पढ़ाया जाता हैं। गुणन, योग की अवधारणा की अनुपालन करता है और उस पर विकसित होता है। ● संख्या बोध को योग और व्यवकलन की, अवधारणा से पूर्व विकसित करने की आवश्यकता होती हैं।

Explanations:

गणितीय अवधारणाएँ पदानुक्रमित होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक कक्षा से दूसरी कक्षा में व्यावहारिक और वैचारिक ज्ञान पर निर्मित होती है, अर्थात् उन्हें पहले अंकगणित, फिर बीजगणित, त्रिकोणमिति और कलन जैसे पूर्व निर्धारित क्रम में पढ़ाया जाता हैं। गुणन, योग की अवधारणा की अनुपालन करता है और उस पर विकसित होता है। ● संख्या बोध को योग और व्यवकलन की, अवधारणा से पूर्व विकसित करने की आवश्यकता होती हैं।