Correct Answer:
Option C - गणितीय अवधारणाएँ पदानुक्रमित होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक कक्षा से दूसरी कक्षा में व्यावहारिक और वैचारिक ज्ञान पर निर्मित होती है, अर्थात् उन्हें पहले अंकगणित, फिर बीजगणित, त्रिकोणमिति और कलन जैसे पूर्व निर्धारित क्रम में पढ़ाया जाता हैं। गुणन, योग की अवधारणा की अनुपालन करता है और उस पर विकसित होता है।
● संख्या बोध को योग और व्यवकलन की, अवधारणा से पूर्व विकसित करने की आवश्यकता होती हैं।
C. गणितीय अवधारणाएँ पदानुक्रमित होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे एक कक्षा से दूसरी कक्षा में व्यावहारिक और वैचारिक ज्ञान पर निर्मित होती है, अर्थात् उन्हें पहले अंकगणित, फिर बीजगणित, त्रिकोणमिति और कलन जैसे पूर्व निर्धारित क्रम में पढ़ाया जाता हैं। गुणन, योग की अवधारणा की अनुपालन करता है और उस पर विकसित होता है।
● संख्या बोध को योग और व्यवकलन की, अवधारणा से पूर्व विकसित करने की आवश्यकता होती हैं।